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UP: पांच करोड़ की लागत से बनी टंकी 5 दिन में गिरी! सरकार ने लापरवाह इंजीनियरों पर गिराई गाज, निर्माण एजेंसियों को किया ब्लैकलिस्ट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. दरअसल, यहां एक निर्माणाधीन पानी की टंकी अचानक भरभरा कर गिर गई. ये घटना विकास खंड पहला के बेहमा चुनका गांव की है, जहां पेयजल योजना के तहत टंकी का निर्माण हो रहा था.

UP: पांच करोड़ की लागत से बनी टंकी 5 दिन में गिरी! सरकार ने लापरवाह इंजीनियरों पर गिराई गाज, निर्माण एजेंसियों को किया ब्लैकलिस्ट
Photo- @anuj_yadav786/X

Sitapur Water Tank Collapsed: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. दरअसल, यहां एक निर्माणाधीन पानी की टंकी अचानक भरभरा कर गिर गई. ये घटना विकास खंड पहला के बेहमा चुनका गांव की है, जहां पेयजल योजना के तहत टंकी का निर्माण हो रहा था. जैसे ही टंकी गिरी, इलाके में हड़कंप मच गया. गनीमत रही कि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. जांच के बाद सामने आया कि इस पूरे मामले में भारी अनियमितता बरती गई थी. सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के सहायक अभियंता (AE) और अवर अभियंता (JE) को बर्खास्त कर दिया है.

इसके साथ ही जल निगम (ग्रामीण) के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जेई के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं.

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एजेंसियों को किया गया ब्लैकलिस्ट

सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि इस टंकी को बनाने वाली निर्माण एजेंसी और उसकी गुणवत्ता जांच करने वाली थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी पर भी कार्रवाई हुई है. दोनों एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. साथ ही निर्माण एजेंसी पर 5 प्रतिशत लिक्विडेटेड डैमेज पेनाल्टी भी लगाई गई है. शासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने का फैसला लिया है.

एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें जल निगम (ग्रामीण) के मुख्य अभियंता, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के एक मुख्य अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता शामिल हैं। यह कमेटी तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.

पांच टंकियों के निर्माण में पाई गई खामी

गौरतलब है कि यह टंकी जल जीवन मिशन योजना के तहत बन रही थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में साफ पानी की व्यवस्था करना है। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि टंकी बनते ही जमींदोज हो गई. सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत अब तक 16,000 से ज्यादा पानी की टंकियों का सफल परीक्षण हो चुका है.

इनमें से 5 टंकियों के निर्माण में खामी पाई गई थी, जिनमें से एक यह सीतापुर की टंकी भी है. इन मामलों में पहले भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है.

सरकारी योजनाओं में कब थमेगा भ्रष्टाचार?

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि जब इतनी बड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं, तो क्या उनमें काम की गुणवत्ता पर सही से निगरानी रखी जा रही है? और अगर नहीं, तो आखिर इसकी कीमत कौन चुका रहा है?

(The above story first appeared on LatestLY on May 30, 2025 10:25 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).