Silver Rate Today, February 12, 2026: भारतीय सर्राफा बाजार में आज, 12 फरवरी 2026 को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. बुधवार को आई 15,000 रुपये से अधिक की रिकॉर्ड तेजी के बाद, गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण घरेलू स्तर पर कीमतों में हल्की नरमी देखी गई है. वर्तमान में अधिकांश शहरों में चांदी 2.60 लाख रुपये से 3.10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच कारोबार कर रही है.
प्रमुख भारतीय शहरों में आज का भाव
भारत के विभिन्न शहरों में मांग और स्थानीय करों के आधार पर चांदी की कीमतों में अंतर देखा जा रहा है. दक्षिण भारतीय शहरों में औद्योगिक मांग के कारण कीमतें अक्सर प्रीमियम पर रहती हैं. यह भी पढ़े: Gold Rate Today, February 12, 2026: भारत में सोने की कीमतों में उछाल, जानें दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहर के ताजा रेट
| शहर | चांदी का भाव (प्रति किलो) |
| नई दिल्ली | ₹ 3,06,900 |
| मुंबई | ₹ 3,06,900 |
| चेन्नई | ₹ 3,13,900 |
| हैदराबाद | ₹ 3,13,900 |
| कोलकाता | ₹ 3,01,900 |
| बेंगलुरु | ₹ 3,00,900 |
| जयपुर | ₹ 3,06,900 |
| लखनऊ | ₹ 3,06,900 |
वैश्विक बाजार और डॉलर का प्रभाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने चांदी की कीमतों को प्रभावित किया है. हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर निवेशकों की लिवाली (Buying) और इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण बाजार में रिकवरी की कोशिशें जारी हैं. हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है.
औद्योगिक मांग
चांदी केवल एक कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कमोडिटी भी है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स के निर्माण में इसके बढ़ते उपयोग ने लंबी अवधि के लिए इसके भविष्य को सकारात्मक बनाया है. विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के मध्य तक औद्योगिक आपूर्ति की कमी के कारण चांदी एक बार फिर 4 लाख रुपये के स्तर को चुनौती दे सकती है.
उतार-चढ़ाव का दौर
फरवरी 2026 की शुरुआत चांदी के लिए काफी उथल-पुथल भरी रही है. जनवरी के अंत में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद एक समय इसमें 30% तक की भारी गिरावट आई थी. इस सप्ताह की शुरुआत से बाजार संभलता हुआ दिख रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के आंकड़ों के कारण अस्थिरता अभी भी बनी हुई है.













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