Sajjan Kumar Acquitted: सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 1984 सिख विरोधी दंगों के मामले में बरी
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Sajjan Kumar Acquitted: दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों (1984 Anti-Sikh Riots Case) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया है. यह मामला दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा और हत्याओं से संबंधित था. राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह ने संक्षिप्त आदेश सुनाते हुए 78 वर्षीय सज्जन कुमार को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया.

क्या था मामला?

यह मामला 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़की हिंसा से जुड़ा है. सज्जन कुमार पर जनकपुरी में सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या का आरोप था. इसके अलावा, उन पर विकासपुरी में एक अन्य घटना का भी आरोप था, जहां गुरचरण सिंह नामक व्यक्ति को कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया गया था. यह भी पढ़े:  1984 Sikh Riot: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट बड़ी राहत, सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या मामले में बरी

अदालती कार्यवाही और SIT की जांच

दशकों पुराने इन मामलों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से न्यायमूर्ति जी.पी. माथुर समिति की सिफारिश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था. इस SIT ने 114 बंद हो चुके मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी, जिनमें से एक यह मामला भी था.

अगस्त 2023 में निचली अदालत ने सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे. हालांकि, अदालत ने उस समय SIT द्वारा लगाई गई हत्या की धारा 302 को हटा दिया था. पिछले साल 23 सितंबर को इस मामले में सुनवाई पूरी हुई थी और 22 दिसंबर को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

साक्ष्यों का अभाव और सज्जन कुमार का पक्ष

सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि वह इन घटनाओं में शामिल नहीं थे. उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और हिंसा के समय वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे.

मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब नवंबर 2023 में पीड़िता मंजीत कौर का बयान दर्ज किया गया. मंजीत कौर ने अदालत में कहा कि उन्होंने भीड़ से सुना था कि सज्जन कुमार वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सज्जन कुमार को घटनास्थल पर नहीं देखा था. इसी तरह के साक्ष्यों की कमी को देखते हुए अदालत ने उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया.

अन्य मामलों में स्थिति

सज्जन कुमार 1984 के दंगों के समय सांसद थे और उन पर भीड़ को उकसाने के कई आरोप लगे हैं. हालांकि इस मामले में उन्हें राहत मिली है, लेकिन वह एक अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. उस मामले में अदालत ने टिप्पणी की थी कि उन्हें दशकों तक "राजनीतिक संरक्षण" के कारण न्याय से बचने में मदद मिली. फिलहाल उनकी सजा के खिलाफ अपील उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में लंबित है.