Sabarimala Gold Theft Case: सबरीमाला स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर के स्वर्ण चोरी मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. विशेष जांच दल (SIT) ने शुक्रवार को मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंडारारू राजीवरु को गिरफ्तार कर लिया. तिरुवनंतपुरम में कई घंटों की गहन पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी उस हाई-प्रोफाइल जांच का हिस्सा है जिसने मंदिर के उच्चतम धार्मिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा रखा है.
मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी का घटनाक्रम
सबरीमाला में 'तंत्री' के वंशानुगत पद पर आसीन कंडारारू राजीवरु को जांच दल ने मंदिर के सोने के दुरुपयोग से जुड़े सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया है. SIT अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारी 9 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे दर्ज की गई। राजीवरु इस मामले में गिरफ्तार होने वाले 11वें व्यक्ति हैं. इससे पहले मुख्य आरोपी उण्णीकृष्णन पोट्टी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार के बयानों में राजीवरु की संलिप्तता का संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया. यह भी पढ़े: Sabarimala Gold Scam: सबरीमाला स्वर्ण घोटाले में एसआईटी ने चोरी गया 400 ग्राम सोना बेल्लारी से बरामद किया
क्या है पूरा स्वर्ण चोरी मामला?
यह पूरा विवाद मंदिर के 'श्रीकोविल' (गर्भगृह) और 'द्वारपालक' (रक्षक देवता) की मूर्तियों पर लगी सोने की परतों की चोरी और हेराफेरी से जुड़ा है. जांच में सामने आया है कि "मरम्मत और पुनः प्लेटिंग" के बहाने मंदिर की पवित्र स्वर्ण-लेपित तांबे की प्लेटों को अवैध रूप से परिसर से बाहर ले जाया गया था.
SIT की मुख्य जांच रिपोर्ट के अनुसार:
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अवैध परिवहन: मरम्मत के नाम पर सोने की वस्तुओं को सबरीमाला मैनुअल का उल्लंघन कर चेन्नई ले जाया गया।
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हेराफेरी: आधिकारिक तौर पर स्वीकृत सोने की तुलना में बहुत कम मात्रा का उपयोग किया गया और बाकी सोना कथित तौर पर गायब कर दिया गया.
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भ्रष्टाचार: चूंकि तंत्री को देवस्वोम बोर्ड से वेतन मिलता है, इसलिए उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं लगाई गई हैं.
कौन हैं कंडारारू राजीवरु?
कंडारारू राजीवरु 'थड़ामन मदोम' परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिसके पास सबरीमाला में मुख्य पुजारी (तंत्री) के रूप में कार्य करने का वंशानुगत अधिकार है.मंदिर के सभी अनुष्ठानिक मामलों में तंत्री का निर्णय अंतिम होता है.राजीवरु ने पहले दावा किया था कि उनकी भूमिका केवल मरम्मत के लिए धार्मिक अनुमति देने तक सीमित थी, लेकिन SIT का आरोप है कि उनके संबंध मुख्य आरोपियों के साथ थे और वे अवैध प्रायोजन (Sponsorship) सौदों से अवगत थे.
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
यह घोटाला 2025 में तब सामने आया जब मंदिर के सोने के स्टॉक में भारी विसंगतियां पाई गईं. केरल उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया था. इस मामले में पूर्व TDB अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच कर रहा है.
मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी के साथ ही SIT अब केरल उच्च न्यायालय के समक्ष एक व्यापक रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है, क्योंकि भारत के सबसे बड़े मंदिर घोटालों में से एक की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है













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