विदेश की खबरें | नाटो को दक्षिणपूर्व एशिया में संभल कर कदम रखने चाहिए, जहां उपनिवेशवाद के जख्म अब भी ताजा हैं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. न्यू बर्न्सविक, 30 मई (द कन्वरसेशन) उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मौजूदगी ऐसा कदम है जो क्षेत्रीय संघर्ष तथा तनाव को बढ़ाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाटो को यूरोपीय उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद के उसके इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता, जिसने आधुनिक एशिया को आकार दिया- तथा आज जो चीनी राष्ट्रवाद में अहम भूमिका निभाता है।