कोलंबो, आठ अगस्त भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने श्रीलंका में एक स्कूल के दौरे के दौरान बच्चों को पोषण से भरपूर आहार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया. उन्होंने कोविड-19 महामारी और देश के आर्थिक संकट से प्रभावित लोगों से भी बात की. तेंदुलकर ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिसेफ के सद्भावना दूत के तौर पर कहा, “बच्चे भविष्य होते हैं; अगर आज हम उनकी सहायता करेंगे, तो कल वे हमें गौरवान्वित करेंगे.” यह भी पढ़ें: हरमनप्रीत कौर चाहती हैं कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम खेले अधिक टेस्ट मैच
पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि श्रीलंका में कई परिवार बच्चों को आवश्यक गुणवत्ता और मात्रा में भोजन देने में सक्षम नहीं हैं.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “कई बच्चे बौनेपन से पीड़ित हैं.”
तेंदुलकर (50) को पूरे दक्षिण एशिया में स्वच्छता पर जोर देने के लिए 2013 में क्षेत्र के लिए यूनिसेफ का दूत नियुक्त किया गया था.
उन्होंने कहा, “जब मैं स्कूल में मैच खेलता था, तब आलम यह था कि जब मैं दोपहर के समय बल्लेबाजी करता था तो भोजन नहीं कर पाता था। मैं कुछ सॉफ्ट ड्रिंक पीकर बल्लेबाजी करता था.”
तेंदुलकर ने कहा कि जब खेल का स्तर बेहतर हो गया तो उन्हें अलग तरह से तैयारी करनी पड़ी. उन्होंने कहा, “यह तैयारी कुछ ऐसी थी जिसे मैं अनजाने में नजरअंदाज कर दिया करता था.”
तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें बाद में पता चला कि ठीक से दोपहर का भोजन नहीं करने से उनकी सेहत पर असर पड़ा.
उन्होंने कहा, “मैं एक महत्वपूर्ण मैच में लंच के बाद बाहर निकला और सबसे पहली चीज जो मैं करना चाहता था वह थी खाना.”
क्रिकेटर ने कहा कि यह पोषण को लेकर एक बड़ा सबक था.
तेंदुलकर ने कहा, “बच्चों को उनकी पूरी क्षमता दिखाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता होती है। उनकी शिक्षा और पोषण में निवेश करके, हम न केवल उनके भविष्य में बल्कि हर देश के भविष्य में निवेश कर रहे हैं.”
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