नयी दिल्ली, छह दिसंबर केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नीलाचल इस्पात निगम लि. से जुड़े पक्षों से ओडिशा की इस इस्पात कंपनी को पटरी पर लाने के लिये रूपरेखा तैयार करने को कहा है।
नीलाचल इस्पात निगम लि. (एनआईएनएल) सार्वजनिक क्षेत्र के चार उपक्रमों...एमएमटीसी, एनएमडीसी, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (भेल) और मेकॉन...तथा ओडिशा सरकार की दो कंपनियों आईपीआईसीओएल और ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) की संयुक्त उद्यम है।
कुल 11 लाख टन क्षमता का एकीकृत एनआईएनएल संयंत्र ओडिशा के कलिंगनगर में है और फिलहाल इसका कामकाज निलंबित है। यह प्रधान के पैतृक निवास स्थान अंगुल से करीब 100 किलोमीटर दूर है।
इस्पात मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, ‘‘मंत्री (प्रधान) एनआईएनएल और उसके कर्मचारियों की समस्याओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने सभी संबद्ध पक्षों से विचार-विमर्श किया है और कंपनी को पटरी पर लाने तथा उसके कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिये रूपरेखा तैयार करने एवं उसे लागू करने को कहा है।
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इसके अलावा, इस्पात मंत्रालय भी संयंत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिये मदद कर रहा है।
एनआईएनएल में 10.10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली एमएमडीसी को कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिये कंपनी के खाते में 20 करोड़ रुपये तत्काल डालने को निर्देश दिया गया है।
सूत्र ने कहा कि इससे पहले, मार्च 2020 में भी एनएमडीसी ने एनआईएनएल को 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि़ (सेल) ने एनआईएनएल के 75 करोड़ रुपये के कच्चे माल की खरीद की है।
एनआईएनएल के वरिष्ठ कर्मचारी ने ओडिशा से फोन पर पीटीआई- से कहा, ‘‘एनआईएनएल के कर्मचारिरयों का वेतन 10 महीने से लंबित है। इसके अलावा करीब 3,500 कर्मचारी ठेके पर हैं, वे भी प्रभावित हैं। संयंत्र में पहले का माल बचा हुआ है जिसकी लागत करीब 240 करोड़ रुपये है।’’
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