अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों को पोलैंड भेजने की सोच रहे हैं. हालांकि, पोलैंड ने कहा है कि उन्हें ऐसी कोई भनक भी नहीं लगी है.अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बीती 9 मई 2026 को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे शायद जर्मनी से हटाए जा रहे अमेरिकी सैनिकों को पोलैंड भेज सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि पोलैंड को शायद ये अच्छा लगेगा. उन्होंने ये भी जोड़ा कि अमेरिका और पोलैंड के रिश्ते शानदार रहे हैं और उनके रिश्ते पोलैंड के राष्ट्रपति के साथ बहुत अच्छे हैं और वे उन्हें बेहद पसंद भी करते हैं. ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को जर्मनी से पोलैंड भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
ट्रंप का यह बयान अमेरिका के उस फैसले के तहत आया है जिसमें जर्मनी में तैनात 5000 अमेरिकी सैनिकों को हटाया जाना है. ट्रंप ने तो यहां तक कहा है कि वह शायद सैनिकों की संख्या बढ़ा भी सकते हैं. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि सैनिकों को हटाए जाने की प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों के अंदर पूरी की जाएगी.
जर्मनी में करीब 35,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो किसी भी यूरोपीय देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं. दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका ने अपने सैनिकों को जर्मनी में तैनात किया था. इसमें ना सिर्फ सैनिक बल्कि सैन्य अधिकारी और उनके परिवार वाले भी शामिल हैं.
ट्रंप के संभावित फैसले की पोलैंड को कोई खबर नहीं
हालांकि, पोलैंड को ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि जर्मनी से हटाए जा रहे अमेरिकी सैनिकों को वापस अमेरिका भेजने के बजाय कहीं और तैनात किया जा सकता है. यह बात पोलैंड के प्रधानमंत्री डॉनल्ड टस्क ने कही है. जब टस्क से पूछा गया कि क्या वॉशिंगटन ने इस बात का कोई संकेत दिया है कि इन सैनिकों को वापस अमेरिका भेजने के बजाय नाटो के पूर्वी मोर्चे पर तैनात किया जा सकता है तो इस पर उन्होंने कहा, "फिलहाल हमारे पास ऐसे कोई संकेत नहीं हैं."
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोत्सकी कह चुके हैं कि पोलैंड अमेरिकी सैनिकों का स्वागत करने के लिए तैयार है. बीती 6 मई 2026 को उन्होंने कहा था कि पोलैंड के पास जरूरी आधारभूत संरचनाएं हैं. इसलिए वह ट्रंप से कहेंगे कि इन अमेरिकी सैनिकों को यूरोप में ही रहने दिया जाए. लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि आखिरी फैसला राष्ट्रपति ट्रंप पर ही निर्भर करता है.
जर्मनी से नाराजगी है ट्रंप के फैसले की वजह?
ईरान युद्ध के बाद यूरोपीय देशों से खुला समर्थन हासिल ना होने के बाद ट्रंप ने यह फैसला किया है. इससे पहले जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा था कि ईरान के साथ दो महीने से चल रही जंग में ईरान ने अमेरिका को अपमानित किया है और इस युद्ध से बाहर निकलने की अमेरिका की रणनीति उन्हें नजर नहीं आ रही है.
ट्रंप के फैसले को मैर्त्स के इसी बयान की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, मैर्त्स ने ट्रंप के इस फैसले के बाद कहा था कि उन्हें अमेरिका के इस फैसले पर कोई हैरानी नहीं है और वे इसे ईरान युद्ध पर दोनों देशों के मतभेद से जोड़कर नहीं देखते. लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि वह ट्रंप और ट्रांसअलटांटिक रिश्तों को बेहतर करने अपनी कोशिश जारी रखेंगे.
किंग्स कॉलेज लंदन की सैन्य विश्लेषक मरीना मिरोन ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि अमेरिका के इस फैसले का असर ना केवल यूरोपीय रक्षा पर, बल्कि यूक्रेन के युद्ध पर भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि कई यूरोपीय सिस्टम अमेरिकी हथियार प्रणालियों का संचालन कर रही हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जर्मन सरकार अमेरिकी सैनिकों को हटाए जाने से खाली हुई जगह को तुरंत भरने में सक्षम नहीं है, चाहे वह आर्थिक निवेश भी क्यों ना कर ले.













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