उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और ऐतिहासिक शहर मेरठ में 'सट्टा' जैसे अवैध जुआ खेलों का चलन चिंता का विषय बना हुआ है. डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब सट्टेबाजी का यह कारोबार गलियों से निकलकर मोबाइल ऐप्स और वेबसाइटों तक पहुंच गया है. 'मेरठ सिटी सट्टा' के नाम से संचालित होने वाले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स लोगों को कम समय में अमीर बनने का सपना दिखाते हैं. हालांकि, मेरठ पुलिस और जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल होने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
डिजिटल माध्यमों से बढ़ता प्रसार
मेरठ में सट्टेबाजी का स्वरूप अब बदल चुका है. पहले जहां यह गुप्त ठिकानों पर होता था, वहीं अब सट्टा किंग जैसी वेबसाइटों के माध्यम से 'मेरठ सिटी' के विशेष परिणाम (Results) घोषित किए जाते हैं. लोग व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम चैनलों के जरिए नंबरों पर दांव लगाते हैं. तकनीक के इस्तेमाल ने इस अवैध धंधे को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण बना दिया है, लेकिन साइबर सेल की मदद से पुलिस अब इन सिंडिकेट्स पर नकेल कस रही है.
पुलिस की कार्रवाई और 'जीरो टॉलरेंस' नीति
उत्तर प्रदेश सरकार की अपराध के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत मेरठ पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है.
हालिया छापेमारी: शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने सट्टा संचालकों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान चलाया है.
गैंगस्टर एक्ट: सट्टा चलाने वाले मुख्य सरगनाओं पर केवल जुआ अधिनियम ही नहीं, बल्कि गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है ताकि उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क किया जा सके.
सीसीटीवी और निगरानी: संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया है ताकि सट्टेबाजी के ठिकानों का पता लगाया जा सके.
सट्टेबाजी के सामाजिक और आर्थिक जोखिम
सट्टेबाजी केवल एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पतन का कारण भी बन रहा है. मेरठ के कई मध्यमवर्गीय परिवार इस लत के कारण कर्ज के जाल में फंस चुके हैं. जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स में धोखाधड़ी की संभावना 99% होती है, क्योंकि इनका एल्गोरिदम संचालक के फायदे के लिए बनाया जाता है.
कानूनी प्रावधान और सजा
भारत में सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 के तहत जुआ खेलना और खिलाना दंडनीय अपराध है. इसके अलावा, ऑनलाइन सट्टेबाजी के मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धाराएं भी लागू होती हैं. मेरठ प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध सट्टा वेबसाइट या ऐप की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को दें.
पृष्ठभूमि: मेरठ और सट्टे का इतिहास
मेरठ में सट्टा मटका और अन्य सट्टेबाजी के खेलों का इतिहास पुराना रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी "ई-लॉटरी" और "नंबर गेम" के रूप में ब्रांडिंग ने युवाओं को आकर्षित किया है. पुलिस प्रशासन का मानना है कि केवल कानून के जरिए इसे खत्म नहीं किया जा सकता, इसके लिए जन-जागरूकता और युवाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना भी आवश्यक है.













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