नयी दिल्ली, पांच जून नागर विमानन मंत्रालय ने देश में ड्रोन के विनिर्माण और इस्तेमाल के लिए नियमों का मसौदा जारी किया। नियमों के मसौदे में प्रस्ताव किया गया है कि कोई भी अधिकृत विनिर्माता या आयातक ड्रोन की बिक्री विमानन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से मान्यता प्राप्त व्यक्ति या इकाई को ही कर सकता है।
नियमों का मसौदा ऐसे समय जारी किया गया है जबकि कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के मद्देनजर निगरानी, संक्रमण दूर करने और वीडियोग्राफी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है।
नियमों में कहा गया है कि ड्रोन के आयातक, विनिर्माता, व्यापारी, मालिक या परिचालक को डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी। कोई भी आयातक या विनिर्माता सिर्फ अधिकृत व्यापारी या मालिक को ही ड्रोन बेच सकेगा।
मसौदे में कहा गया है कि डीजीसीए के पास मानवरहित विमान प्रणाली (यूएएस) के पास इन नियमों के तहत किसी तरह की अनुमति देने से पहले यूएएस के विनिर्माण या रखरखाव सुविधा के निरीक्षण का अधिकार होगा।
इसमें कहा गया है कि देश में कोई भी यूएएस तीसरे पक्ष के बिना वैध बीमा पॉलिसी के बीच परिचालन नहीं कर सकेगा। इसके अलावा कोई यूएएस डीजीसीए द्वारा दी गई अनुमति से अधिक भार नहीं ढो सकेगा।
नियमों के मसौदे में कहा गया है कि देश में सिर्फ नैनो श्रेणी के 250 ग्राम से कम के ड्रोन के परिचालन की अनुमति होगी। भारी ड्रोन के परिचालन के लिए एक दक्ष रिमोट पायलट जरूरी होगा।
अजय
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