मुंबई, 13 जुलाई : महाराष्ट्र में किसी जमाने में मजबूत ताकत रही कांग्रेस अब अपने परंपरागत जनाधार में बड़ी खामोशी के साथ निरंतर कमी होने की समस्या से जूझ रही है. कभी पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले कई परिवारों की नई पीढ़ी या तो विपक्षी दलों के साथ गठबंधन कर रही है या फिर सक्रिय राजनीति से दूर जा रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव कांग्रेस की संगठनात्मक गहराई को कमजोर कर रहा है और इस वर्ष होने वाले महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दल की मुश्किलें बढ़ा रहा है.
पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य में अपनी सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा था. महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को केवल 16 सीट से ही संतोष करना पड़ा था. कांग्रेस ने शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)-शरदचंद्र पवार के साथ गठबंधन में 101 सीट पर चुनाव लड़ा था. हाल के महीनों में कांग्रेस से लंबे समय से जुड़े परिवारों के नेताओं ने ऐसे कदम उठाए हैं, जो समर्पित समर्थकों के बीच पार्टी की घटती लोकप्रियता को दर्शाते हैं. यह भी पढ़ें : कर्नाटक की शिवमोगा सेंट्रल जेल में अजीब मामला, छापा पड़ने पर डर के मारे कैदी ने निगला मोबाइल फोन! जानें फिर कैसे बची जान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनंत गाडगिल ने दशकों से पार्टी से जुड़े रहने वाले परिवारों की दूसरी पीढ़ी के नेताओं के पार्टी छोड़ने के सिलसिले पर चिंता व्यक्त की है. गाडगिल का संबंध संभवत: उन अंतिम निष्ठावान परिवारों में से एक से है जो हमेशा पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं. तीसरी पीढ़ी के राजनीतिक नेता गाडगिल ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि कांग्रेस की विचारधारा से गहराई से जुड़े होने के नाते वह 139 साल पुरानी पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.













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