मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में आज परिवहन व्यवस्था (Transport System) पूरी तरह चरमराई हुई है. ई-चालान प्रणाली (E-Challan System) और भारी टैक्स (Heavy Taxes) के विरोध में राज्य की परिवहन यूनियनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (Maharashtra Transporters Action Committee) (M-TAC) के नेतृत्व में करीब 1 लाख वाहन चालक और मालिक सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे राज्य भर में परिवहन सेवाएं (Transport Services) बुरी तरह बाधित हैं. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (Transport Minister Pratap Sarnaik) के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद यूनियनों ने अपना प्रदर्शन तेज कर दिया है. यह भी पढ़ें: Maharashtra: परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की घोषणा, अगले पांच वर्षों में MSRTC का राजस्व बढ़ेगा, विज्ञापन से कमाएंगे ₹250 करोड़ से अधिक
क्या आज कैब, बस और ऑटो उपलब्ध हैं?
हड़ताल के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में स्कूल बसें, निजी बसें, ऑटो-रिक्शा और ओला-उबर जैसी कैब सेवाएं लगभग सड़कों से नदारद हैं.
- परिवहन की स्थिति: लोकल ट्रेन और मुंबई मेट्रो सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन स्टेशनों से गंतव्य तक पहुंचने के लिए 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' मिलना मुश्किल हो गया है.
- छात्रों की परेशानी: यह हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब राज्य में बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं. स्कूल बस मालिकों के संघ (SBOA) ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है, जिससे परीक्षार्थियों के सामने संकट खड़ा हो गया है.
हड़ताल के पीछे का मुख्य कारण: ई-चालान विवाद
प्रदर्शनकारी यूनियनों का मुख्य विरोध 'ई-चालान' प्रणाली को लेकर है. उनका आरोप है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत लागू की गई यह व्यवस्था मनमानीपूर्ण है.
- मुख्य मांग: चालान को चुनौती देने से पहले 50% जुर्माना राशि अग्रिम जमा करने का नियम उन्हें मंजूर नहीं है. इसे ड्राइवर 'दोष की धारणा' (presumption of guilt) बताकर संविधान का उल्लंघन मान रहे हैं.
- अटका हुआ पैसा: यूनियनों का दावा है कि राज्य में अभी 4,500 करोड़ रुपये के चालान लंबित हैं, जिनमें से कई तकनीकी त्रुटियों के कारण गलत तरीके से काटे गए हैं. यह भी पढ़ें: Mumbai One App: बस एक ऐप से मुंबई में मेट्रो, लोकल ट्रेन और बस से कर पाएंगे ट्रैवल, जानें यह कैसे काम करेगा
परिवहन यूनियनों की प्रमुख मांगें
यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं आता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे. उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- जुर्माना भरने के 50% नियम में तत्काल सुधार.
- परिवहन विवादों के निपटारे के लिए एक समर्पित न्यायिक निकाय का गठन.
- त्रुटिपूर्ण और पुराने ई-चालानों को रद्द करना.
- वाहनों में पैनिक बटन और अन्य महंगे उपकरणों को अनिवार्य रूप से लगाने पर रोक.
सरकारी रुख और सुरक्षा व्यवस्था
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि सरकार यूनियनों की उचित मांगों पर विचार करने के लिए सकारात्मक है और आज फिर से एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है. दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए राज्य भर में, विशेषकर मुंबई के आजाद मैदान और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी है.
आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलें और अधिक से अधिक रेल नेटवर्क का उपयोग करें. आजाद मैदान में भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने की उम्मीद है, जिससे यातायात व्यवस्था और प्रभावित हो सकती है.













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