नयी दिल्ली, 27 अगस्त पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरे भारत में कोविड-19 से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के कारण इस साल कार्बन उत्सर्जन में लगभग आठ प्रतिशत कमी आने का अनुमान है।
‘पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ द्वारा बुधवार को ‘व्यापार स्थिरता में प्रतिमान बदलाव- कोविड-19 परिदृश्य के बाद की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियां’ विषय पर आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत कुमार बाजपेयी ने कहा, ‘‘महामारी ने बहुत सारी चुनौतियां दी हैं, लेकिन इसने अर्थव्यवस्थाओं को शुरू करने, सुधार योजनाओं के माध्यम से समाजों के पुनर्निर्माण और जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया है।’’
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बाजपेयी ने कहा, ‘‘पूरे भारत में कोविड-19 लॉकडाउन के कारण 2020 में कार्बन उत्सर्जन में लगभग आठ प्रतिशत कमी आने का अनुमान है।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘प्रकृति’’ कई दवाओं और उद्योगों का एक अनिवार्य स्रोत है जैसे निर्माण, कृषि, खाद्य और पेय पदार्थ इस पर अत्यधिक निर्भर हैं।
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बाजपेयी ने कहा कि इस महामारी का प्रभाव ‘‘इतना जटिल’’ है कि आने वाले वर्षों तक इसका विश्लेषण जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और महामारी मानवजनित गतिविधियों से संबंधित हैं।
इस मौके पर ‘पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ के अध्यक्ष डी के अग्रवाल ने हवा और पानी की गुणवत्ता में सुधार पर चर्चा की।
उन्होंने कहा, ‘‘हम लॉकडाउन के कारण प्रकृति की बेहतरी देख सकते थे और, हम देख सकते हैं कि प्रकृति ने चीजों को स्थिर करने का अपना तरीका अपनाया था।’’
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