बेंगलुरु, 23 जुलाई : पुलिस ने एक कॉलेज छात्र की कथित आत्महत्या के मामले में उसके तीन सहपाठियों के खिलाफ उकसाने के आरोपों में मामला दर्ज किया है. पुलिस ने बुधवार को बताया कि हासन निवासी अरुण सी. का शव 11 जुलाई को उसके घर में लोहे की रॉड से साड़ी के जरिये लटका हुआ मिला था. अरुण आठवें सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद छुट्टियों में घर लौटा था. अधिकारियों के अनुसार, अरुण शहर के एक निजी कॉलेज में आर्किटेक्चर का छात्र था. घटना के समय उसके माता-पिता काम पर गए हुए थे. अरुण के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें अरुण ने अपने कदम के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है.
नोट में किसी भी सहपाठी का नाम नहीं लिखा था. शुरुआत में, ‘‘अप्राकृतिक मौत’’ का मामला दर्ज किया गया था. हालांकि, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब अरुण के माता-पिता ने मदनायकनहल्ली थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने उसके तीन सहपाठियों पर कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप पर बेटे को ‘‘परेशान’’ करने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ‘‘उत्पीड़न’’ के कारण उसकी मृत्यु हुई. प्राथमिकी में माता-पिता ने दावा किया कि अरुण को तीन सहपाठियों की ओर से एक वर्ष से अधिक समय तक ‘‘मानसिक उत्पीड़न और अपमान’’ का सामना करना पड़ा. इसमें कहा गया कि आरोपी सहपाठियों ने कथित तौर पर कक्षा के व्हाट्सएप ग्रुप में उसके बारे में ‘‘अपमानजनक संदेश’’ भेजे, जिसकी जानकारी अरुण के दो दोस्तों ने उसके माता-पिता को दी. यह भी पढ़ें : ट्रंप ने 25 बार किया युद्ध रुकवाने का दावा और प्रधानमंत्री चुप; दाल में कुछ काला है: राहुल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अरुण ने अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया था और उसे कक्षा के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया था. यह बात उसके माता-पिता को उसकी मृत्यु के बाद ही पता चली. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘शिकायत के आधार पर, हमने तीनों छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. मामले की जांच की जा रही है और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’’ उन्होंने कहा कि जांच के क्रम में पुलिस जल्द ही अरुण के कमरे में रहने वाले छात्रों, दोस्तों, सहपाठियों और कॉलेज अधिकारियों को नोटिस जारी करेगी ताकि उसकी मौत के कारणों का पता लगाया जा सके.













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