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जिज्ञासु बच्चों का एक आम सवाल, पक्षी अपना घोंसला कैसे बनाते हैं?

दुनियाभर में बच्चों ही नहीं बड़ों के लिए भी यह सवाल जिज्ञासा पैदा करता है कि पक्षी घोंसला कैसे बनाते हैं? हालांकि इस सवाल से भी पहले यह जानना अधिक रोचक होगा कि पक्षी घोंसला क्यों बनाते हैं? दरअसल सभी पक्षी घोंसला नहीं बनाते हैं.

जिज्ञासु बच्चों का एक आम सवाल, पक्षी अपना घोंसला कैसे बनाते हैं?
child ( Photo Credit: pixabay)

सिडनी, 26 नवंबर : दुनियाभर में बच्चों ही नहीं बड़ों के लिए भी यह सवाल जिज्ञासा पैदा करता है कि पक्षी घोंसला कैसे बनाते हैं? हालांकि इस सवाल से भी पहले यह जानना अधिक रोचक होगा कि पक्षी घोंसला क्यों बनाते हैं?

दरअसल सभी पक्षी घोंसला नहीं बनाते हैं. उदाहरण के लिए, पेंगुइन पिता अपने कीमती अंडे को अपने पैरों पर रखते हैं (उसे जमी हुई जमीन की ठंडक से दूर रखने के लिए). कुछ पक्षी, जैसे कोयल, अपने अंडे किसी और के घोंसलों में रख देते हैं. कुछ पक्षी अपने अंडों को जमीन पर पत्तियों या कंकड़ के बीच, या चट्टानों पर बहुत कम सुरक्षा में रख देते हैं. घोंसले बनाने वाले पक्षियों की बात की जाए तो उनके लिए, ऐसा करने का एक मुख्य लक्ष्य है: अपने अंडों और चूजों को सुरक्षित रखना. तोते सहित कई पक्षी पेड़ों के खोखले तने में भी अपना घोंसला बनाते हैं. यही कारण है कि पेड़ों को न काटने की सलाह दी जाती है, भले ही वह सूखे हुए हों. इस बीच, कूकाबुरा अपनी शक्तिशाली चोंच का उपयोग दीमक के घोंसले में घुसने और अंदर एक आरामदायक घोंसला बनाने के लिए करते हैं.

और प्यारी चित्तीदार गीत गाने वाली चिड़िया किसी कोने में छोटी-छोटी सुरंग खोदती है और उसके भीतर आखिरी छोर पर अंडे रखने के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक स्थान बनाती है. कुछ पक्षी, जैसे ब्रश टर्की, जमीन पर विशाल टीले बनाने में महीनों बिताते हैं जो अंदर से गर्म हो सकते हैं. नर टर्की यह सुनिश्चित करता है कि टीले के अंदर जमीन का तापमान बिल्कुल सही है, और फिर मादा को अंडे देने देता है. वह अंडों के चारों ओर बड़ी मात्रा में धूल जमा करता है ताकि यह जांचा जा सके कि वह स्थान बहुत गर्म या ठंडा तो नहीं है. पक्षी विभिन्न प्रकार के घोंसलों का निर्माण करते हैं. तैरते हुए घोंसले, कप, गुंबद, पेंडुलम और टोकरी के आकार के घोंसले. उन्हें सरकंडों, टहनियों, पत्तियों, घास, काई या मिट्टी से भी बनाया जा सकता है. मैगपाई-लार्क (जिसे ‘‘पीवीज़’’ भी कहा जाता है), एपोस्टलबर्ड्स और चॉफ मिट्टी के कटोरे जैसे घोंसले बनाते हैं जो टेराकोटा के बर्तनों की तरह दिखते हैं. ऐसा करने के लिए, वे अपनी चोंच में मिट्टी और घास इकट्ठा करते हैं और इसे अपनी लार के साथ मिलाने के लिए चारों ओर हिलाते हैं. फिर वे इसे एक शाखा से जोड़ सकते हैं और घोंसला पूरा होने तक ऊपर की ओर बना सकते हैं.

वास्तव में, पक्षियों की लार घोंसलों के निर्माण के लिए एक मजबूत और चिपचिपी सामग्री है. एक प्रकार का गोंद बनाने के लिए पक्षी अक्सर लार और कीचड़ को मिलाते हैं. और कुछ स्विफ्टलेट पूरी तरह से ठोस लार से अपना घोंसला बनाते हैं. विली वैगटेल एक अन्य प्रकार के गोंद का उपयोग करते हैं वह है चिपचिपा मकड़ी का जाला. वे मकड़ी के जाले का उपयोग करके घास की सिलाई करते हैं और ये जाले हवा और पानी के खिलाफ भी घोंसलों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. हालांकि उन्हें मकड़ी के जाले को इकट्ठा करने की तकनीक में महारत हासिल करनी होती है, वर्ना कई बार वह उनके पंखों में फंस जाता है. हमारे बगीचों में अकसर आने वाले परिंदे मैगपाई और कौवे भी चतुर घोंसला बनाने वाले होते हैं. वे न केवल कुशलता से अपने तिनकों को जमा करके कटोरे की शक्ल में ढाल लेते हैं, बल्कि वे अपने घोंसलों में कई मानव निर्मित सामग्री का भी उपयोग करते हैं. घोंसला बनाने के लिए वह कई बार कपड़े, तार या धागे का उपयोग करते हैं. रेड काइट्स जैसे कुछ पक्षियों को अपने घोंसलों को इनसानों द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान से ‘‘सजाते’’ भी देखा गया है. और ऑस्ट्रेलियाई बब्बलर्स अपने घोंसलों के अंदर कंगारू के मल की एक मोटी दीवार बनाते हैं, जिसपर किसी नरम चीज की तह बनाते हैं, अपने चूजों को गर्म रखने के लिए. यह भी पढ़ें : टीके से जुड़ी मौतों की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘टीकाकरण पर संदेह नहीं कर सकते’

वास्तव में घोंसलों को बुनने से पहले पक्षी उस स्थान का चयन करते हैं, जहां उन्हें घोंसला बनाना होता है और फिर उस जगह आमतौर पर तिनके या टहनियाँ बिछाकर आधार बनाते हैं फिर वे घोंसला बनाने के लिए सामान बटोरकर लाते हैं और अपनी चोंच और पैरों का उपयोग चुनी हुई सामग्री को बुनने के लिए करते हैं. वे अपनी चोंच से छोटे तिनकों को पट्टियां बनाने के लिए ठीक उसी तरह ऊपर नीचे खींचते हैं, जैसे कोई कुशल कारीगर गलीचा बुनता है. वे गांठ भी बांध सकते हैं! घोंसलों को बनने में वास्तव में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उन्हें अक्सर साल दर साल दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. बुनकर पक्षी बुनाई में इतने अच्छे होते हैं कि वे जटिल घोंसलों का निर्माण कर सकते हैं जो पूरे पेड़ों को ढँक देते हैं और इनमें कई कक्ष होते हैं.

संक्षेप में, पक्षी वास्तव में बुद्धिमान जीव होते हैं. वे अपनी चोंच और पैरों के साथ-साथ अपनी बुद्धि का उपयोग करके उपलब्ध सामग्री के साथ घोंसला बनाने के सबसे चतुर तरीके खोजते हैं. और वे अपने माता-पिता या साथियों से सीखकर इसमें माहिर होते जाते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 26, 2021 04:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).