अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके देश के रक्षा मंत्रालय (Department of Defense - DoD) का नाम बदलकर 'युद्ध मंत्रालय' (Department of War) कर दिया है. ट्रंप ने पहली बार इसका आइडिया अगस्त में दिया था, जब उन्होंने कहा था कि 'युद्ध मंत्रालय' नाम सुनने में "ज़्यादा बेहतर लगता है". उन्होंने कहा, "डिफेंस (रक्षा) बहुत ज़्यादा रक्षात्मक लगता है… और हम रक्षात्मक तो रहना चाहते हैं, लेकिन अगर ज़रूरत पड़े तो हमें आक्रामक भी होना होगा". इस कदम को ट्रंप की उस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत वह अमेरिकी सेना को ज़्यादा आक्रामक दिखाना चाहते हैं.
नाम के पीछे का इतिहास
यह कोई नया नाम नहीं है. असल में, अमेरिका के रक्षा विभाग का पुराना नाम 'युद्ध विभाग' ही था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इसका नाम बदला था. उस समय मकसद एक ऐसी एकीकृत सैन्य कमान बनाना था जिससे सेना के विभागों में आपसी टकराव खत्म हो और फिजूलखर्ची कम हो.
1947 से पहले, 158 सालों तक अमेरिका का 'युद्ध विभाग' ही अमेरिकी सेना के संचालन और रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार था.
ट्रंप ने इसी इतिहास को ध्यान में रखकर यह फैसला किया है. उन्होंने कहा, "जब इसका नाम युद्ध विभाग था, तब हमारी जीत का एक अविश्वसनीय इतिहास था", और उन्होंने खास तौर पर पहले और दूसरे विश्व युद्ध का ज़िक्र किया.
Secretary of Defense letters coming down at the Pentagon. pic.twitter.com/MTofWOsNpM
— Acyn (@Acyn) September 5, 2025
'युद्ध विभाग' की शुरुआत कैसे हुई?
अमेरिकी कांग्रेस ने 1789 में औपचारिक रूप से 'युद्ध विभाग' की स्थापना की थी. इसका काम सेना (Army), नौसेना (Navy) और मरीन कॉर्प्स (Marine Corps) का संचालन और रखरखाव देखना था. इसका प्रमुख एक नागरिक 'सेक्रेटरी ऑफ वॉर' होता था.
बाद में 1798 में नौसेना के लिए एक अलग 'नेवी डिपार्टमेंट' बना दिया गया. 1940 के दशक तक, युद्ध विभाग अमेरिकी सैन्य व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण अंग बना रहा.
BREAKING: The Department of Defense ➡️ The Department of War 🇺🇸
President Donald J. Trump just signed an Executive Order restoring the name of the Department of War.
America First. Peace Through Strength.🦅 pic.twitter.com/jzk3MGQjpT
— The White House (@WhiteHouse) September 5, 2025
नाम बदलने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना और नौसेना दो अलग-अलग इकाइयों के तौर पर लड़ रही थीं. युद्ध के बाद हुए विश्लेषण में पाया गया कि यह व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं थी. राष्ट्रपति ट्रूमैन और कई कमांडरों का मानना था कि विभागों के बीच बंटवारे और आपसी प्रतिद्वंद्विता ने सेना की कुल प्रभावशीलता को कम किया होगा. इसलिए, ट्रूमैन देश की पूरी रक्षा प्रणाली को एक एकीकृत विभाग के तहत लाना चाहते थे.
BREAKING: New seal for the Department of War pic.twitter.com/pZ1aQY0OhX
— The Spectator Index (@spectatorindex) September 5, 2025
आज के रक्षा मंत्रालय (DoD) का जन्म
1947 में, कांग्रेस के समर्थन से 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' पारित किया गया. इस कानून ने युद्ध विभाग और नौसेना विभाग को मिला दिया और साथ ही नई बनी वायु सेना (Air Force) को भी इसमें शामिल कर लिया. इस नए एकीकृत संगठन का नाम रखा गया 'नेशनल मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट' (NME).
लेकिन NME नाम दो साल भी नहीं चल पाया. इसे जल्द ही बदलकर 'डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस' (DoD) कर दिया गया. इसकी वजह बड़ी दिलचस्प थी. NME का शॉर्ट फॉर्म सुनने में "एनिमी" (enemy) यानी 'दुश्मन' जैसा लगता था.
JUST IN: Donald Trump will sign an executive order Friday to rename the Department of Defense as the Department of War, Fox News reports.
We are living in the dumbest of times. pic.twitter.com/qlD8FCMqxB
— Republicans against Trump (@RpsAgainstTrump) September 4, 2025
अब ट्रंप ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए वापस वही पुराना नाम 'युद्ध मंत्रालय' अपना लिया है, ताकि दुनिया में अमेरिकी सेना की एक ज़्यादा आक्रामक छवि पेश की जा सके.













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