ताइवान ने घरेलू तकनीक से बनाई पहली पनडुब्बी

ताइवान ने घरेलू तकनीक की मदद से पनडुब्बी बनाने में सफलता हासिल की है.

विदेश Deutsche Welle|
ताइवान ने घरेलू तकनीक से बनाई पहली पनडुब्बी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ताइवान ने घरेलू तकनीक की मदद से पनडुब्बी बनाने में सफलता हासिल की है. गुरुवार को यह पनडुब्बी लॉन्च की गई. चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा मजबूत करना चाहता है.पनडुब्बी का नाम चीनी भाषा में "हाई कुन” रखा गया है जिसका मतलब पौराणिक समुद्री जीव होता है. ताइवान के राष्ट्रपति, साई इंग-वेन ने पनडुब्बी को लॉन्च करने के मौके पर कहा, "इतिहास इस दिन को हमेशा याद रखेगा.” राष्ट्रपति का कहना था कि, "कुछ समय पहले पनडुब्बी बनाना नामुमकिन था लेकिन आज हमने खुद डिजाइन कर इसे बना दिया है.”

सात साल लगे पनडुब्बी बनाने में

पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी सीएसबीसी के अध्यक्ष चेंग वेन-इऑन ने कहा कि यह ताइवान के लिए, "यह विषम युद्ध में एक जादुई हथियार बनेगा.” हाई कुन करीब 80 मीटर लंबा है और इसका वजन करीब 2,500 से 3,000 टन है. यह अब समुद्र में परीक्षण के लिए जाएगी और 2025 से ताइवान का रक्षा विभाग उसका इस्तेमाल शुरू कर सकेगा. माना जाता है कि ताइवान के पास फिलहाल दो पनडुब्बियां थी जो उन्होंने 1980 में नीदरलैंड्स से खरीदी थी. अमरीका ने भी 2001 में 11 पनडुब्बियां ताइवान को देने की मंजूरी दी थी लेकिन इन्हें कभी दिया नहीं गया. चीन से बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने अपनी सैन्य बजट को करीब 19 खराब डॉलर तक बढ़ाया है. 2016 में राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन के खिलाफ जा कर पनडुब्बी प्रोग्राम को शुरू किया था.

चीन से बढ़ता तनाव

चीनका कहना है कि ताइवान उस का हिस्साहै और पिछले कुछ सालों में चीन ने वहां सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है. हाल के समय में कई युद्धक विमानों ने ताइवान की सीमा को लांघ कर उड़ान भरी है. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन के पास लगभग 60 पनडुब्बियां हैं, जिनमें से छह परमाणु ऊर्जा से संचालित हैं और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं.

यह ताइवान के नए बेड़े की तुलना में बहुत ज्यादा है. ताइवान के इंस्टिट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च में विशेषज्ञ जियांग सिन-बियाओ का कहना है कि बाशी चैनल और ओकिनावा जलमार्ग जैसे प्रमुख जगहों को पनडुब्बियों से ताइवान अब रोक सकता है. इससे चीन के लिए समस्याएं पैदा होंगी. जियांग ने चीन की सेना का जिक्र करते हुए कहा, "यह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के ताइवान को पूर्व और पश्चिम से घेरने और हमला करने के प्रयास को बाधित कर सकता है."

एसडी/एनआर(एएफपी)

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    प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

    ताइवान ने घरेलू तकनीक की मदद से पनडुब्बी बनाने में सफलता हासिल की है. गुरुवार को यह पनडुब्बी लॉन्च की गई. चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा मजबूत करना चाहता है.पनडुब्बी का नाम चीनी भाषा में "हाई कुन” रखा गया है जिसका मतलब पौराणिक समुद्री जीव होता है. ताइवान के राष्ट्रपति, साई इंग-वेन ने पनडुब्बी को लॉन्च करने के मौके पर कहा, "इतिहास इस दिन को हमेशा याद रखेगा.” राष्ट्रपति का कहना था कि, "कुछ समय पहले पनडुब्बी बनाना नामुमकिन था लेकिन आज हमने खुद डिजाइन कर इसे बना दिया है.”

    सात साल लगे पनडुब्बी बनाने में

    पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी सीएसबीसी के अध्यक्ष चेंग वेन-इऑन ने कहा कि यह ताइवान के लिए, "यह विषम युद्ध में एक जादुई हथियार बनेगा.” हाई कुन करीब 80 मीटर लंबा है और इसका वजन करीब 2,500 से 3,000 टन है. यह अब समुद्र में परीक्षण के लिए जाएगी और 2025 से ताइवान का रक्षा विभाग उसका इस्तेमाल शुरू कर सकेगा. माना जाता है कि ताइवान के पास फिलहाल दो पनडुब्बियां थी जो उन्होंने 1980 में नीदरलैंड्स से खरीदी थी. अमरीका ने भी 2001 में 11 पनडुब्बियां ताइवान को देने की मंजूरी दी थी लेकिन इन्हें कभी दिया नहीं गया. चीन से बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने अपनी सैन्य बजट को करीब 19 खराब डॉलर तक बढ़ाया है. 2016 में राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन के खिलाफ जा कर पनडुब्बी प्रोग्राम को शुरू किया था.

    चीन से बढ़ता तनाव

    चीनका कहना है कि ताइवान उस का हिस्साहै और पिछले कुछ सालों में चीन ने वहां सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है. हाल के समय में कई युद्धक विमानों ने ताइवान की सीमा को लांघ कर उड़ान भरी है. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन के पास लगभग 60 पनडुब्बियां हैं, जिनमें से छह परमाणु ऊर्जा से संचालित हैं और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं.

    यह ताइवान के नए बेड़े की तुलना में बहुत ज्यादा है. ताइवान के इंस्टिट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च में विशेषज्ञ जियांग सिन-बियाओ का कहना है कि बाशी चैनल और ओकिनावा जलमार्ग जैसे प्रमुख जगहों को पनडुब्बियों से ताइवान अब रोक सकता है. इससे चीन के लिए समस्याएं पैदा होंगी. जियांग ने चीन की सेना का जिक्र करते हुए कहा, "यह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के ताइवान को पूर्व और पश्चिम से घेरने और हमला करने के प्रयास को बाधित कर सकता है."

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