गोलीबारी खत्म! पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सुलह, कतर के दोहा में हुई बातचीत, युद्धविराम पर सहमति
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने अपनी सीमा पर चल रही भीषण लड़ाई को तत्काल रोकने का फैसला किया है. दोनों देशों के बीच यह सहमति कतर की राजधानी दोहा में हुई बातचीत के बाद बनी. इस बातचीत में तुर्की ने भी मदद की. आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते से दोनों देशों की सीमा पर जबरदस्त गोलीबारी और लड़ाई चल रही थी, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए.

जब से 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आई है, तब से यह दोनों पड़ोसियों के बीच सबसे बड़ी और गंभीर लड़ाई थी.

किसने की बातचीत?

इस शांति वार्ता के लिए अफगानिस्तान की तरफ से उनके रक्षा मंत्री मुल्ला मुहम्मद याकूब आए थे, जबकि पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बातचीत में हिस्सा लिया. कतर ने बताया है कि दोनों देश आगे भी मिलते रहेंगे ताकि यह शांति बनी रहे और इसे ठीक से लागू किया जा सके.

क्यों हो रही थी ये लड़ाई?

अब सवाल उठता है कि ये लड़ाई शुरू क्यों हुई? असल में दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

  • पाकिस्तान का आरोप: पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकवादी आकर उनके देश में हमले करते हैं और तालिबान सरकार उन्हें रोक नहीं रही है. हाल ही में एक आत्मघाती हमले में पाकिस्तान के 7 सैनिक मारे गए थे.
  • तालिबान का जवाब: वहीं, तालिबान इन आरोपों को गलत बताता है. उनका कहना है कि पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान में शांति नहीं चाहता और उल्टे इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी गुटों की मदद कर रहा है.

पाकिस्तान पर दोगलेपन का आरोप

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर "दोगलापन" करने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जैसे ही लड़ाई रोकने की बात आगे बढ़ी, पाकिस्तान ने हवाई हमले कर दिए, जिसमें आम नागरिक मारे गए. इन हमलों में तीन अफगानी खिलाड़ियों की भी मौत हो गई. इसी वजह से नाराज होकर अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में होने वाली T-20 क्रिकेट सीरीज खेलने से भी मना कर दिया.

हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि उनके हवाई हमले सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हुए थे, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए और किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा.

फिलहाल के लिए दोनों देशों के बीच लड़ाई रुक गई है, जो एक अच्छी खबर है. लेकिन एक-दूसरे पर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह शांति कब तक टिकेगी.