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Pakistan Fuel Crisis: मिडल ईस्ट तनाव के बीच पाकिस्तान में गहराया तेल संकट, स्कूल दो हफ्ते बंद; सरकारी दफ्तर हफ्ते में चार दिन खुलेंगे

मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण पाकिस्तान एक गंभीर ईंधन संकट की चपेट में आ गया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने देशव्यापी ऊर्जा आपातकाल (Energy Emergency) जैसे कड़े कदमों की घोषणा की है.

Pakistan Fuel Crisis: मिडल ईस्ट तनाव के बीच पाकिस्तान में गहराया तेल संकट, स्कूल दो हफ्ते बंद; सरकारी दफ्तर हफ्ते में चार दिन खुलेंगे
(Credit-Wikimedia commons)

इस्लामाबाद, 10 मार्च 2026. मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण पाकिस्तान एक गंभीर ईंधन संकट की चपेट में आ गया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने देशव्यापी ऊर्जा आपातकाल (Energy Emergency) जैसे कड़े कदमों की घोषणा की है. सरकार ने ईंधन बचाने के उद्देश्य से स्कूल-कॉलेजों को बंद करने और सरकारी कामकाज के घंटों को सीमित करने का फैसला किया है.

शिक्षण संस्थानों पर बड़ा फैसला

ईंधन की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने तत्काल प्रभाव से सभी स्कूलों को अगले दो सप्ताह के लिए बंद करने का आदेश दिया है. वहीं, उच्च शिक्षण संस्थानों (कॉलेज और यूनिवर्सिटी) के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपनी सभी कक्षाएं 'ऑनलाइन मोड' पर संचालित करें. इस फैसले का उद्देश्य छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के आवागमन में होने वाले पेट्रोल-डीजल के खर्च को कम करना है.  यह भी पढ़े:  LPG Booking Rule Changed: एलपीजी बुकिंग नियम में बड़ा बदलाव, मिडल ईस्ट में तनाव के चलते अब सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक करा पाएंगे, पहले था 21 दिन

सरकारी दफ्तरों के लिए नए नियम

सरकारी कामकाज को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए हैं. अब सरकारी दफ्तर हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे. इसके अलावा:

  • सरकारी विभागों के 50% कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) करने के निर्देश दिए गए हैं.
  • सरकारी अधिकारियों और विभागों को मिलने वाले फ्यूल कोटे में 50% की भारी कटौती की गई है.
  • यह कटौती अगले दो महीनों तक प्रभावी रहेगी ताकि उपलब्ध स्टॉक का अधिकतम उपयोग किया जा सके.

संकट का मुख्य कारण

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रही है, और मिडल ईस्ट में ईरान-इजरायल जैसे देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़ दिया है. पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की कमी के कारण पाकिस्तान के लिए तेल खरीदना अब बड़ी चुनौती बन गया है.

भविष्य की चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडल ईस्ट में युद्ध के हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो पाकिस्तान में बिजली संकट भी गहरा सकता है, क्योंकि वहां बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस पर आधारित है. सरकार ने निजी क्षेत्र से भी अपील की है कि वे ऊर्जा संरक्षण में सहयोग करें और अपने स्तर पर वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दें.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 10, 2026 09:06 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).