Afghanistan Crisis: तालिबान के आक्रमण के 4 दिन बाद काबुल की सड़कों पर कोई महिला नजर नहीं आई
काबुल पर तालिबान द्वारा तेज और अप्रत्याशित आक्रमण के चार दिन बाद अफगानिस्तान की राजधानी की सड़कों पर कोई महिला नजर नहीं आई. द गार्जियन ने यह जानकारी दी. पहले सड़कों पर कुछ महिलाओं को पारंपरिक इस्लामी परिधान नीले बुर्का पहने देखा जा सकता था, जो अफगानिस्तान में प्रथागत होने के बावजूद अब तक काबुल में व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता था.
काबुल, 20 अगस्त : काबुल (Kabul) पर तालिबान द्वारा तेज और अप्रत्याशित आक्रमण के चार दिन बाद अफगानिस्तान की राजधानी की सड़कों पर कोई महिला नजर नहीं आई. द गार्जियन ने यह जानकारी दी. पहले सड़कों पर कुछ महिलाओं को पारंपरिक इस्लामी परिधान नीले बुर्का पहने देखा जा सकता था, जो अफगानिस्तान (Afghanistan) में प्रथागत होने के बावजूद अब तक काबुल में व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता था. कई महिलाएं आमतौर पर मध्य पूर्व और अरब देशों में पहने जाने वाले लंबे काले कपड़े पहनती हैं. सभी महिलाओं के साथ एक पुरुष अभिभावक होता है - एक जरूरत जो तालिबान ने देशभर में महिलाओं पर लागू की है. इनमें से कई महिलाएं किराना सामान की खरीदारी करती दिखती थीं, मगर यह आसान सा काम अब उनके लिए बेहद खतरनाक हो गया है.
यह विश्वास करना कठिन है कि कुछ ही दिनों पहले काबुल की सड़कों पर महिलाओं को अपना व्यवसाय चलाने के लिए जाते हुए देखा जाता था. अब वे सुरक्षा जोखिम का अतिक्रमण करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है. अब महिलाएं डर से भरे हुए रहती हैं. उनकी आंखें लगातार जीवंत सड़कों पर गश्त कर रहे तालिबान लड़ाकों से किसी भी संभावित आक्रमण की ओर इशारा करती हैं. अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से सभी शैक्षणिक केंद्र, स्कूल, विश्वविद्यालय, सरकारी भवन और निजी कार्यालय बंद कर दिए गए हैं. शहर की सड़कों पर कोई कानून या सुरक्षा अधिकारी नहीं है. कोई पुलिस या यातायात अधिकारी नहीं दिखता. काबुल के एक निवासी का कहना है कि उसने तालिबान को सड़क के बीच में तेज गति से यातायात के खिलाफ पुलिस की गाड़ी चलाते देखा. यह भी पढ़ें: Afghanistan Crisis: अमेरिकी बलों का लड़ाई में साथ देने वाले अफगान अधिकारी को काबुल से निकाला गया
पोल ई सोरख, अफगानिस्तान की युवा और शिक्षित पीढ़ी के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध क्षेत्र अब जीवंत नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ उदास दिखने वाले पुरुषों को छोड़कर सड़कें और फुटपाथ खाली हैं. ताज बेगम रेस्तरां की मालिक लैला हैदरी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा, "हमारे लिए दुनिया हमेशा के लिए बदल गई. ताज बेगम नहीं रही." काबुल के पतन के बाद उसने कई व्यवसायी महिलाओं के साथ अपना रेस्तरां बंद कर दिया. Jकुछ सौ मीटर दूर एक और लोकप्रिय रेस्टोरेंट, जिसे महिलाएं भी चलाती हैं, बंद है. काबुल में जो रेस्तरां और कैफे खुले रहते हैं, उनमें कोई महिला कर्मचारी या ग्राहक नहीं हैं. शहरभर में सभी ब्यूटी सैलून बंद हैं, हालांकि पुरुष नाई की दुकानें खुली हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 20, 2021 10:33 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

