Japan Earthquake: जापान में फिर कांपी धरती, 6.0 की तीव्रता वाले भूकंप से दहला होंशु द्वीप
भूकंप की प्रतीकात्मक तस्वीर (Image Generated by AI)

Japan Earthquake: कल रात जापान में लोग गहरी नींद में थे कि अचानक धरती कांपने लगी. पूर्वी तट के पास, होंशु द्वीप पर 6.0 की तीव्रता का एक जोरदार भूकंप आया. ये खबर सुनते ही सबकी सांसें अटक गईं, क्योंकि जापान और भूकंप का तो पुराना नाता है. लेकिन अच्छी खबर ये है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है. आइए, आपको पूरी कहानी आसान भाषा में बताते हैं.

कब और कहाँ आया भूकंप?

ये भूकंप 4 अक्टूबर 2025 को UTC समय के अनुसार दोपहर करीब 3:21 बजे आया. अगर जापान के लोकल टाइम की बात करें, तो वहां 5 अक्टूबर की आधी रात हो चुकी थी. इसका केंद्र होंशु द्वीप के पूर्वी किनारे पर, फुकुशिमा इलाके के पास समुद्र में था. जी हाँ, ये वही फुकुशिमा है जहां 2011 में वो भयानक भूकंप और सुनामी आई थी. भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 50 किलोमीटर की गहराई में था. इसकी सबसे पहली जानकारी जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने दी.

क्या कोई नुकसान हुआ?

6.0 की तीव्रता का भूकंप मध्यम दर्जे का माना जाता है, लेकिन ये डराने के लिए काफी होता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने भी इस भूकंप की पुष्टि की और बताया कि इसका केंद्र फुकुशिमा के पास नमिए शहर के करीब था.

राहत की बात ये है कि अभी तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. सबसे बड़ी चिंता सुनामी की होती है, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की है. जापानी सरकार ने फौरन हरकत में आते हुए स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया है और अब तक सब कुछ नियंत्रण में लग रहा है.

भूकंप और जापान का पुराना रिश्ता

जापान "रिंग ऑफ फायर" पर बसा है, एक ऐसा इलाका जहां धरती के नीचे बहुत हलचल होती रहती है. इसी वजह से यहां हर साल सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप आते हैं. आपको 2011 का 9.0 तीव्रता वाला भूकंप तो याद ही होगा, जिसने भारी तबाही मचाई थी.

लेकिन जापान के लोगों ने प्रकृति के इस मिजाज के साथ जीना सीख लिया है. वहां की इमारतें और घर खास तकनीक से बनाए जाते हैं ताकि वे भूकंप के झटके झेल सकें. बच्चों को स्कूल से ही भूकंप से बचने की ट्रेनिंग दी जाती है. सायरन बजते ही लोग फौरन सुरक्षित जगहों पर चले जाते हैं.

फिलहाल, जापान में स्थिति शांत है. लेकिन ये घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए.