नई दिल्ली, 18 मई: ब्रह्मांड (Universe) और हमारे सौरमंडल (Solar System) के रहस्यों में रुचि रखने वालों के लिए एक दिलचस्प अपडेट सामने आया है. हाल ही में 'अमेजन डेली क्विज़' (Amazon Daily Quiz) के FunZone सेक्शन में पूछे गए एक सवाल के बाद यह विषय एक बार फिर चर्चा में है कि आखिर सौरमंडल में किस ग्रह के पास सबसे ज्यादा चंद्रमा (Moon) (प्राकृतिक उपग्रह) हैं? इसका प्रामाणिक और सही उत्तर शनि ग्रह (Saturn) है. छल्लों वाला यह गैसीय विशालकाय ग्रह अपने निकटतम प्रतिस्पर्धी को काफी पीछे छोड़ते हुए सौरमंडल के 'मून लीडरबोर्ड' में शीर्ष पर काबिज है. यह भी पढ़ें: Earth's Second Moon: धरती का 'दूसरा चांद', जानें क्या भारत से दिखेगा मिनी मून?
सौरमंडल का मून लीडरबोर्ड: शनि बनाम बृहस्पति
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा सत्यापित वर्तमान खगोलीय आंकड़ों के अनुसार, शनि के पास अब सौरमंडल में सबसे अधिक चंद्रमा हैं. शनि के पास 200 से अधिक संभावित प्राकृतिक उपग्रहों का एक विशाल परिवार है, जिनमें से 140 से अधिक को आधिकारिक तौर पर खोजा, पुष्टि और सूचीबद्ध किया जा चुका है.
यह विशाल संग्रह शनि को सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) से काफी आगे रखता है. बृहस्पति इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 95 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त चंद्रमा हैं. इन दो गैस दिग्गजों की तुलना में सौरमंडल के अन्य ग्रहों के पास चंद्रमाओं की संख्या बेहद कम है.
बृहस्पति और शनि के बीच ब्रह्मांडीय मुकाबला
"किंग ऑफ द मून्स" (चंद्रमाओं का राजा) का यह प्रतिष्ठित खिताब ऐतिहासिक रूप से शनि और बृहस्पति के बीच बदलता रहा है. कुछ समय पहले तक, लगातार हुई नई खोजों के कारण बृहस्पति इस सूची में आगे निकल गया था. हालांकि, उन्नत ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप (धरती पर मौजूद आधुनिक दूरबीनों) का उपयोग करने वाले खगोलविदों के वैश्विक प्रयासों ने इस संतुलन को वापस शनि के पक्ष में झुका दिया.
वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि के चंद्रमाओं की संख्या में यह नाटकीय वृद्धि कई छोटे और अनियमित चंद्रमाओं की खोज के कारण हुई है. ये पिंड आमतौर पर केवल कुछ किलोमीटर व्यास के हैं और ग्रह से बहुत दूर, झुकी हुई और विपरीत (Retrograde) कक्षाओं में चक्कर काट रहे हैं। खगोलविदों का अनुमान है कि ये छोटे पिंड प्राचीन काल में हुए टकरावों के दौरान टूटे बड़े चंद्रमाओं के अवशेष हैं.
गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव और चंद्रमाओं की विविधता
शनि और बृहस्पति के पास इतने बड़े उपग्रह तंत्र होने का मुख्य कारण उनका विशाल द्रव्यमान (Mass) और शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल है. अरबों वर्षों के दौरान, इन ग्रहों ने अपने पास से गुजरने वाले अंतरिक्ष मलबे, धूमकेतुओं और एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रहों) को अपने गुरुत्वाकर्षण जाल में फंसाया, जो बाद में स्थायी कक्षाओं में स्थापित हो गए.
शनि के इन चंद्रमाओं की भौतिक विशेषताएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. इनमें एक तरफ टाइटन (Titan) जैसा विशाल उपग्रह शामिल है, जो आकार में बुध (Mercury) ग्रह से भी बड़ा है और जिसका अपना सघन वायुमंडल है; तो दूसरी ओर बर्फ और चट्टान के छोटे, अनियमित टुकड़े भी हैं जो महज एक मील चौड़े हैं.













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