Tech Layoffs 2025: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का बड़ा खुलासा, 2025 में टेक सेक्टर की छंटनी AI नहीं, आर्थिक मंदी है नौकरियों के जाने की असली वजह
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में तकनीकी क्षेत्र में हो रही छंटनी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव और कंपनियों का पुनर्गठन है। रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां अक्सर अपने वित्तीय संकट को छिपाने के लिए AI का नाम लेकर छंटनी कर रही हैं.
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Tech Layoffs 2025: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा इंसानों की जगह लेने के डर के बीच एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है.ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) के एक हालिया रिसर्च ब्रीफ के अनुसार, 2025 में तकनीकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी के पीछे पारंपरिक आर्थिक कारण मुख्य जिम्मेदार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में कमजोर मांग, धीमी विकास दर और महामारी के बाद की गई अतिरिक्त नियुक्तियों (Over-hiring) का बोझ कम करना इन नौकरियों के जाने की प्राथमिक वजह है.
AI के नाम पर वित्तीय संकट छिपाने की कोशिश
विश्लेषकों का मानना है कि कई कंपनियां छंटनी की घोषणा करते समय जानबूझकर AI एकीकरण (AI Integration) का हवाला दे रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां ऐसा इसलिए करती हैं ताकि वे निवेशकों को यह दिखा सकें कि वे भविष्य की तकनीक के लिए खुद को ढाल रही हैं। असल में, यह अक्सर उनके खराब पूर्वानुमान और वित्तीय तनाव को छिपाने का एक तरीका होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर कामगारों को हटाए जाने की कहानी फिलहाल बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है. यह भी पढ़े: Microsoft Layoffs 2026: माइक्रोसॉफ्ट में फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी? जनवरी में हजारों कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी
आंकड़ों में छंटनी का सच
'चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस' के डेटा से इस दावे को मजबूती मिलती है। साल 2025 के पहले 11 महीनों में अमेरिका में AI के कारण लगभग 55,000 नौकरियां गईं, जो कुल छंटनी का केवल 4.5 प्रतिशत है। इसके विपरीत, इसी अवधि के दौरान 2,45,000 से अधिक छंटनी व्यापक आर्थिक और बाजार स्थितियों के कारण हुई।
अमेरिका में हर महीने औसतन 15 से 18 लाख लोग विभिन्न कारणों से नौकरी खोते हैं, जिनमें से AI के कारण होने वाली बेरोजगारी का हिस्सा अभी भी बहुत कम है.
बेरोजगारी का सीधा संबंध AI से नहीं
रिपोर्ट में इस बात पर भी गौर किया गया है कि नए स्नातकों (Graduates) के बीच बढ़ती बेरोजगारी का सीधा संबंध AI से नहीं है. अमेरिका और यूरोज़ोन में युवाओं के बीच बेरोजगारी का ग्राफ जनरेटिव AI के लोकप्रिय होने से पहले ही बढ़ना शुरू हो गया था। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का कहना है कि डिग्री धारकों की अधिक आपूर्ति और बाजार में उनकी कम मांग के कारण यह स्थिति पैदा हुई है, न कि केवल ऑटोमेशन की वजह से.
कर्मचारियों को नए टूल्स के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत
श्रम बाजार के वर्तमान चरण को नौकरियों के 'विनाश' के बजाय 'परिवर्तन' (Transformation) के रूप में देखा जा रहा है. इसका मतलब है कि काम करने के तरीके बदल रहे हैं और कर्मचारियों को नए टूल्स के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत है.
लंबे समय में, AI उत्पादकता बढ़ाने, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वास्तविक वेतन में वृद्धि करने में सहायक हो सकता है। इससे पूरी तरह से नई जॉब कैटेगरी भी पैदा हो सकती हैं जो शुरुआती नुकसान की भरपाई कर देंगी. फिलहाल, 2025 की सच्चाई यही है कि अधिकांश छंटनी उन आर्थिक वास्तविकताओं से उपजी है जो AI बूम से पहले से मौजूद थीं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 13, 2026 04:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

