What Is Rhabdomyolysis? खेल चाहे कितना भी शानदार या चमकदार क्यों न दिखे, यह वास्तव में बेहद कठिन होता है. खिलाड़ियों का जीवन शारीरिक रूप से थकाने वाला और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. एक समय पर खिलाड़ी अपनी फिटनेस के चरम पर नजर आ सकते हैं, लेकिन दूसरे ही पल एक गंभीर चोट या बीमारी उनके करियर को खतरे में डाल सकती है. कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तरह-तरह की चोटों या बीमारियों से गुजरना पड़ा है, जिससे उनके खेल करियर के कई मूल्यवान वर्ष बर्बाद हुए. हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज तिलक वर्मा ने एक खतरनाक बीमारी ‘रैबडोमायोलिसिस’ (Rhabdomyolysis) के बारे में बताया, जिसने उन्हें मौत के करीब पहुंचा दिया था. यह बीमारी उन्हें अत्यधिक ट्रेनिंग और आराम न करने की वजह से हुई थी. इस लेख में जानते हैं विस्तार से कि आखिर रैबडोमायोलिसिस क्या है. एशिया कप ट्रॉफी के साथ खेल कर रहा मोहसिन नकवी? ACC हेडक्वार्टर से चुराकर अबू धाबी में दूसरे स्थान पर छुपाया; रिपोर्टस
क्या है रैबडोमायोलिसिस?
रैबडोमायोलिसिस एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर की कंकाली मांसपेशियां (Skeletal muscles) तेजी से टूटने लगती हैं. इस बीमारी में मांसपेशियों के फाइबर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो जाते हैं, जिससे उनमें मौजूद एंजाइम, प्रोटीन (जैसे मायोग्लोबिन) और इलेक्ट्रोलाइट्स खून और शरीर के अन्य ऊतकों में लीक हो जाते हैं. इन पदार्थों का रिसाव शरीर के लिए खतरनाक साबित होता है, खासकर किडनी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है.
क्या हैं रैबडोमायोलिसिस के कारण?
इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं. रैबडोमायोलिसिस का कारण ट्रॉमा (जैसे किसी दुर्घटना में कुचल जाना या लंबे समय तक दबाव में रहना), अत्यधिक शारीरिक परिश्रम (जैसे मैराथन दौड़ना, अत्यधिक वर्कआउट), ड्रग्स और टॉक्सिन्स (जैसे स्टैटिन दवाएं, कोकीन, हेरोइन या सांप के जहर), आनुवंशिक विकार (Inherited Muscle Diseases), अत्यधिक तापमान (हीट स्ट्रोक या मालिग्नेंट हाइपरथर्मिया), मेटाबॉलिक विकार, गंभीर डिहाइड्रेशन या संक्रमण भी हो सकते हैं.
क्या हैं रैबडोमायोलिसिस के लक्षण?
इस बीमारी की पहचान कई लक्षणों से की जा सकती है। जिन लोगों को कंधों, जांघों या कमर के निचले हिस्से में मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है, उनके पेशाब का रंग गहरा (लाल, भूरा या चाय जैसा) हो जाता है. यह मायोग्लोबिन के कारण होता है, जिसे किडनी फिल्टर करती है. इसके अलावा मांसपेशियों में सूजन, बुखार, थकान, मतली, उल्टी या भ्रम जैसी समस्याएं भी गंभीर मामलों में देखने को मिलती हैं.
कैसे होता है रैबडोमायोलिसिस का इलाज?
रैबडोमायोलिसिस का समय पर इलाज संभव है. जल्दी निदान और उपचार से रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। इसके उपचार में मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीके शामिल हैं.
- आराम (Rest): मांसपेशियों को ठीक होने के लिए पर्याप्त आराम देना जरूरी है.
- डायलिसिस (Dialysis): अगर मरीज को किडनी फेल्योर हो जाता है तो डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है.
- इलेक्ट्रोलाइट संतुलन: खासकर पोटेशियम के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी होता है.
- इंट्रावीनस फ्लूइड्स (IV Fluids): शरीर में बड़ी मात्रा में फ्लूइड्स दिए जाते हैं ताकि मायोग्लोबिन किडनी से बाहर निकल सके और उन्हें नुकसान न पहुंचे.
रैबडोमायोलिसिस से ठीक होने में कितना समय लगता है?
रैबडोमायोलिसिस के हल्के मामलों में कुछ हफ्तों में सुधार हो जाता है, जबकि गंभीर मामलों में पूरी तरह ठीक होने में कई महीनों का समय लग सकता है.













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