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VIDEO: एमपी के नर्मदापुरम में सर्वाइट कॉन्वेंट स्कूल की 10वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान, पढ़ाई के दबाव में आत्महत्या की आशंका

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित सर्वाइट कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की एक छात्रा द्वारा फांसी लगाकर जान देने का मामला सामने आया है. कक्षा 10वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने सोमवार को अपने घर पर फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली.

VIDEO: एमपी  के नर्मदापुरम में सर्वाइट कॉन्वेंट स्कूल की 10वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान, पढ़ाई के दबाव में आत्महत्या की आशंका

Servite Convent School Student Suicide: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित सर्वाइट कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की एक छात्रा द्वारा फांसी लगाकर जान देने का मामला सामने आया है. कक्षा 10वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने सोमवार को अपने घर पर फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. बताया जा रहा है कि छात्रा स्कूल में आयोजित पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) से लौटी थी, जहां प्री-बोर्ड परीक्षा के कम अंकों को लेकर चर्चा हुई थी.

रिजल्ट को लेकर मानसिक तनाव में थी

मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा दोपहर में अपनी मां के साथ स्कूल से घर लौटी थी. परिजनों के मुताबिक, रिजल्ट को लेकर वह मानसिक तनाव में थी. पुलिस को घटना की सूचना दोपहर बाद मिली, जिसके बाद देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची. यह भी पढ़े:  Greater Noida: निजी विश्वविद्यालय की बीडीएस छात्रा ने दी जान, सुसाइड नोट में फैकल्टी पर लगाए गंभीर आरोप

सर्वाइट कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान

जांच अधिकारी ने क्या कहा

जांच अधिकारी एएसआई (ASI) लक्ष्मण अमोल्य ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला पढ़ाई के दबाव और कम अंकों के कारण उपजे डिप्रेशन का लग रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है.

स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद शहर के पालकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों और कुछ अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा रिजल्ट सुधारने के नाम पर छात्रों पर अत्यधिक दबाव बनाया जाता है.

अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को अंकों के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा है कि स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है.

विशेषज्ञों की सलाह और अपील

इस दुखद घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस छेड़ दी है. शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि परीक्षा के अंक किसी बच्चे की योग्यता का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकते.

छात्रों से अपील

हम सभी विद्यार्थियों से निवेदन करते हैं कि परीक्षा का तनाव या कोई भी अन्य परेशानी होने पर अपने दोस्तों, शिक्षकों या परिजनों से खुलकर बात करें। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जीवन अनमोल है, इसे चुनौतियों से लड़ने के लिए इस्तेमाल करें।

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 05, 2026 10:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).