Shatak Movie Review: ‘शतक’ विचार और विरासत के सौ साल की विश्वसनीय सिनेमाई दास्तां
शतक फिल्म समीक्षा (Photo Credits: File Image)

Shatak Movie Review: भारत में कुछ संगठन ऐसे हैं जिनके नाम लिए जाते हैं, चर्चा शुरू हो जाती है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) यानी आरएसएस (RSS) भी एक ऐसा ही संघ हैं. इसके बारे में राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इसकी शुरुआत कैसे हुई और शुरुआती दशकों में इसकी भूमिका क्या रही—यह पहलू बड़े पर्दे पर कम ही देखने को मिला है. 'शतक' (Shatak) इसी खाली जगह को भरने की कोशिश करती है और संघ के पहले पचास सालों की यात्रा को दर्शकों के सामने रखती है. शतक की खास बात यह है कि कहानी को बिना किसी सीधे राजनीतिक बहस में पड़े, घटनाओं और व्यक्तियों के अनुभवों के जरिए प्रस्तुत किया गया है.

डायरेक्टर आशीष मॉल ने फिल्म को सीधा और समझने लायक अंदाज में बनाया है. लाइव-एक्शन के साथ नई विज़ुअल टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पुराने समय के व्यू जीवंत लगते हैं. सेट, कॉस्ट्यूम और बैकग्राउंड उस दौर का माहौल बनाने में मदद करते हैं. कैमरा वर्क सधा हुआ है और रंगों का चयन विषय के अनुसार रखा गया है. यह भी पढ़ें: 'The Kerala Story 2' पर सियासी घमासान: सीएम पिनाराई विजयन ने बताया 'नफरत का प्रोपेगेंडा', 27 फरवरी को रिलीज होगी फिल्म (View Post)

डायरेक्टर: आशीष मॉल

राइटर: उत्सव दान, रोहित स्टेनली, नितिन सावंत

कॉन्सेप्ट: अनिल अग्रवाल

रनटाइम: 112 मिनट

रेटिंग: 3.5

कहानी की शुरुआत डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से होती है. उन्हें एक समर्पित और अनुशासित व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है, जिन्होंने बहुत साधारण परिस्थितियों में संगठन की नींव रखी. कम लोग लेकिन मजबूत इरादों से शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे आकार लेती है, और देखते ही देखते संघ बड़ा होने लगता है. इसके बाद नेतृत्व माधव सदाशिव गोलवलकर के पास जाता है. फिल्म उस समय को भी दिखाती है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा, खासकर महात्मा गांधी की हत्या के बाद. इन घटनाओं को बिना किसी सनसनी के, शांत तरीकों से पेश किया गया है। ध्यान इस बात पर है कि कठिन परिस्थितियों में संगठन ने खुद को कैसे संभाला और आगे बढ़ने की कोशिश की। फिल्म में दादरा और नगर हवेली की आजादी और कश्मीर से जुड़ी घटनाएं भी शामिल हैं। इन प्रसंगों के ज़रिए यह बताया गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की क्या भूमिका रही.

शतक सिर्फ बड़े नेताओं की कहानी नहीं सुनाती, बल्कि आम लोगों के जीवन, उनके त्याग, परिवार से दूरी और उनके विश्वास को भी जगह दी गई है. यही तत्व फिल्म को ज़्यादा मानवीय बनाते हैं. दर्शक सिर्फ इतिहास नहीं देखते, बल्कि उन लोगों की भावनाएं भी महसूस करते हैं जो इस सँघर्ष का हिस्सा थे.

फिल्म 'शतक' का ऑफिशियल ट्रेलर

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर संयमित हैं और दृश्यों के साथ अच्छे से मेल खाते हैं. संवाद सरल भाषा में हैं, जिससे कहानी आसानी से समझ आती है।फिल्म का निर्माण कृधन मीडियाटेक ने किया है. इसका कॉन्सेप्ट अनिल डी. अग्रवाल ने तैयार किया, जबकि वीर कपूर और आशीष तिवारी ने Ada 360 Degree LLP के तहत को-प्रोड्यूसर के रूप में योगदान दिया है. यह भी पढ़ें: Rashmika Mandanna-Vijay Deverakonda Wedding: मेहमानों के लिए 'नो-फोन पॉलिसी' और सख्त प्राइवेसी नियम; जानें उदयपुर में होने वाले विवाह की पूरी डिटेल

अंत में, शतक एक ऐसी फिल्म है जो मनोरंजन से ज़्यादा सोचने और समझने का मौका देती है! एक बहुत ही अच्छी फिल्म हैं जिसे सही नियत से बनाया गया हैं.