Organ Donation in India: अंगदान का महादान! अब आधार और ABHA आईडी से घर बैठे करें पंजीकरण, जानें मध्य प्रदेश सरकार की नई सम्मान नीति
भारत में अंगदान (Photo Credits: LatestLY)

मुंबई/इंदौर: अंगदान (Organ Donation) को लेकर समाज में बढ़ती जागरूकता और सरकार के नए प्रयासों ने इस 'महादान' को एक नई पहचान दी है. हाल ही में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में अंगदाता विजय जायसवाल (Vijay Jaiswal) को राज्य सरकार द्वारा दिए गए 'गार्ड ऑफ ऑनर' (Guard of Honour) और राजकीय सम्मान ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. इस पहल का उद्देश्य अंगदान की कमी को दूर करना और दाताओं को समाज में नायक का दर्जा देना है. यदि आप भी इस जीवन रक्षक मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो 2026 में इसकी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सरल और डिजिटल हो चुकी है. यह भी पढ़ें: Indore Organ Donation: 49 साल के ब्रेन डेड शख्स को राजकीय सम्मान, अंतिम संस्कार के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया; जानिए क्यों

डिजिटल संकल्प: आधार और ABHA से पंजीकरण

भारत सरकार की 'वन नेशन, वन पॉलिसी' के तहत, अब कोई भी नागरिक National Organ & Tissue Transplant Organisation (NOTTO) के आधिकारिक पोर्टल (notto.abdm.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकता है.

प्रक्रिया: आप अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर या Ayushman Bharat Health Account (ABHA) ID का उपयोग करके कुछ ही मिनटों में संकल्प ले सकते हैं।डोनर कार्ड: फॉर्म भरने के बाद एक डिजिटल 'डोनर कार्ड' जनरेट होता है। हालांकि यह कार्ड कानूनी रूप से अनिवार्य दस्तावेज नहीं है, लेकिन यह आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा टीम और परिवार को आपकी इच्छा के बारे में सूचित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

परिवार की सहमति है सबसे महत्वपूर्ण

भारतीय कानून (THOTA अधिनियम) के अनुसार, भले ही आपके पास डोनर कार्ड हो, लेकिन मृत्यु के समय आपके 'निकटतम संबंधी' (Next of Kin) की लिखित सहमति अनिवार्य होती है.  विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान का संकल्प लेने के बाद अपने परिवार के साथ इस पर चर्चा करना सबसे जरूरी कदम है, ताकि वे समय आने पर आपकी इच्छा का सम्मान कर सकें.

अंगदान के प्रकार: जीवित बनाम मृतक दान

अंगदान को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. जीवित दान (Living Donation): एक स्वस्थ व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक किडनी या लीवर का एक हिस्सा अपने किसी करीबी रिश्तेदार को दान कर सकता है.
  2. मृतक दान (Deceased/Cadaveric Donation): यह तब होता है जब किसी व्यक्ति को मेडिकल बोर्ड द्वारा 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया जाता है. इस स्थिति में, एक अकेला दाता हृदय, लीवर, फेफड़े, गुर्दे, अग्न्याशय और आंतों का दान करके 8 लोगों तक का जीवन बचा सकता है.

मध्य प्रदेश: दान को 'अमरता' का सम्मान

अंगदान को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है. राज्य में अब अंगदान और देहदान करने वालों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) के साथ किया जाता है. इसके अतिरिक्त:

  • दाताओं के परिवारों को 26 जनवरी और 15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है.
  • सरकार ने अंगदाताओं के परिवारों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने का भी वादा किया है, जिसके तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है.

यह नीतियां अंगदान को महज एक 'दान' नहीं, बल्कि 'अमरता' और 'वीरता' के कार्य के रूप में स्थापित कर रही हैं.