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Bishan Singh Bedi Passes Away: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी का 77 वर्ष की उम्र में निधन

उन्होंने 22 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करने के अलावा, 10 वनडे मैचों में सात विकेट भी लिए. 1977-78 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में मेलबर्न और सिडनी टेस्ट में उनकी सबसे यादगार जीत थी. पंजाब के अमृतसर में जन्मे बेदी ने 1966 में भारत में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद, 1968-69 सीज़न में दिल्ली जाने से पहले, उत्तरी पंजाब के साथ अपना प्रथम श्रेणी करियर शुरू किया.

Bishan Singh Bedi Passes Away: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी का 77 वर्ष की उम्र में निधन
बिशन सिंह बेदी( Photo Credit: X Formerly As Twitter)

Bishan Singh Bedi Dies: 1970 के दशक में अपनी घूमती गेंदों से बल्लेबाजों को खूब छकाने वाले पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने 77 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. उनका इंटरनेशनल करियर 12 साल का रहा और उन्होंने कई मैचों में भारत को यादगार जीत दिलाई. बेदी ने 1967 से 1979 के बीच भारत के लिए 67 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने बल्ले से 656 रन बनाने के अलावा 28.71 की औसत से 266 विकेट लिए. बेदी, जिन्हें क्रिकेट के महानतम बाएं हाथ के स्पिनरों में से एक माना जाता है. इरापल्ली प्रसन्ना, बी.एस. के साथ प्रसिद्ध भारतीय स्पिन चौकड़ी का हिस्सा थे. चन्द्रशेखर और एस. वेंकटराघवन ने 1970 के दशक में भारत को घरेलू और विदेशी दोनों परिस्थितियों में कई मैच जिताए. यह भी पढ़ें: बिशन सिंह बेदी के देहांत पर पीएम मोदी, इरफ़ान पठान समेत कई दिग्गजों ने जताया शोक, देखें Tweets

उन्होंने 22 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करने के अलावा, 10 वनडे मैचों में सात विकेट भी लिए. 1977-78 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में मेलबर्न और सिडनी टेस्ट में उनकी सबसे यादगार जीत थी. पंजाब के अमृतसर में जन्मे बेदी ने 1966 में भारत में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद, 1968-69 सीज़न में दिल्ली जाने से पहले, उत्तरी पंजाब के साथ अपना प्रथम श्रेणी करियर शुरू किया.

उनकी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी में महारत के लिए जाना जाता था. उनके पास फ्लाइट, लूप और स्पिन के साथ-साथ क्रीज पर बल्लेबाजों को मात देने के लिए कई तकनीक थी. बेदी ने 1979-80 में उपविजेता रहने के अलावा, 1978-79 में दिल्ली को प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी खिताब भी दिलाया. इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट में नॉर्थहैम्पटनशायर के लिए भी उनका कार्यकाल सफल रहा.

1972 और 1977 के बीच क्लब के लिए 102 मैचों में बेदी ने 20.89 के औसत के साथ 434 विकेट हासिल किए, जो इंग्लिश काउंटी क्रिकेट सर्किट में किसी भारतीय द्वारा सबसे अधिक है.

करियर के बाद, बेदी ने युवा क्रिकेटरों को कोचिंग देना शुरू कर दिया, जिसमें मनिंदर सिंह और मुरली कार्तिक उनके छात्र थे, जिन्होंने भारत के लिए खेला था. इतना ही नहीं उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पंजाब, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर टीमों को भी कोचिंग दी, जिसमें पंजाब ने 1992-93 में रणजी ट्रॉफी जीती.

वह 1990 में कुछ समय के लिए भारतीय टीम के मैनेजर थे। वह खेल से जुड़े सभी मामलों पर एक निडर आवाज थे. अपने खेल के दिनों के दौरान और उसके बाद भी वह हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखते थे.

साथ ही बेदी को उनकी बुद्धिमत्ता, ज्ञान और खेल के प्रति असीम प्रेम के लिए सम्मानित किया जाता था. उन्हें 1969 में अर्जुन पुरस्कार, 1970 में पद्म श्री और 2004 में सीके. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

पिछले कुछ समय से बेदी अस्वस्थ थे और उन्हें कई सर्जरी से गुजरना पड़ा, जिसमें एक घुटने की सर्जरी भी शामिल थी जो इस साल सितंबर के अंत में हुई थी. उनके परिवार में उनकी पत्नी अंजू और दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटी नेहा है और उनके बेटे फिल्म एक्टर अंगद हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 23, 2023 06:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).