Viral Video: लिव-इन रिलेशनशिप पर बिहार की सड़कों पर उठी बहस, संस्कृति, नैतिकता और व्यक्तिगत आज़ादी का टकराव
लिव-इन रिलेशनशिप पर छिड़ी बहस (Photo: X|@NCMIndiaa)

बिहार में राष्ट्रीय पुरुष आयोग द्वारा एक्स पर साझा किए गए एक अनौपचारिक स्ट्रीट इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है. यह इंटरव्यू स्थानीय लोगों के लिव-इन रिलेशनशिप पर विचारों को सामने लाया, जिनमें कट्टर पारंपरिक विरोध से लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता के ज़ोरदार समर्थन तक के ध्रुवीकरणकारी मत शामिल थे. यह बहस ऐसे समय में आई है जब हाल ही में प्रेमानंद महाराज ने 'चरित्रवान महिलाओं' को लेकर विवादास्पद बयान दिया था, जिससे पहले ही सामाजिक चर्चाएं तेज थीं. इंटरव्यू में पारंपरिक पोशाक पहने एक महिला ने लिव-इन रिलेशनशिप का कड़ा विरोध किया. उन्होंने इसे अपनी संस्कृति और समुदाय की नैतिकता के खिलाफ बताया और कहा: "हमारी संस्कृति में, केवल विवाहित जोड़े ही साथ रह सकते हैं."उन्होंने इस प्रथा की तुलना चोरी से जोड़ दिया कि विवाह की रस्में, विशेष रूप से सात फेरे, किसी भी पुरुष और महिला के साथ रहने से पहले अनिवार्य हैं. यह भी पढ़ें; प्यार की अनोखी मिसाल! 70 साल लिव-इन में रहने के बाद 95 साल के दूल्हा और 90 की दुल्हन ने रचाई शादी

महिला ने कहा, "हमारे यहां इसको धंधेवाली बोला जाता है, जिसका मतलब था कि लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को समाज वेश्यावृत्ति से जोड़ता है. उनकी नजर में, यह एक धार्मिक और नैतिक अवमानना है और ऐसे रिश्तों में रहने वाली महिलाएं "चरित्रहीन" मानी जाती हैं.

लिव-इन रिलेशनशिप पर बिहार की सड़क पर दो महिलाओं में बहस

उसी भीड़ से उठी एक चुनौती: व्यक्तिगत आज़ादी की वकालत

उसी उम्र की एक दूसरी महिला ने इन टिप्पणियों को तुरंत साहसपूर्वक चुनौती दी. उन्होंने पारंपरिक सोच को शिक्षा और जागरूकता की कमी का परिणाम बताया. "केवल बिना शिक्षा या बिना विकल्पों वाले लोग ही इस तरह सोच सकते हैं," उन्होंने कहा, कि उनका परिवार खुले विचारों वाला है और वे इस तरह की संकीर्ण सोच से सहमत नहीं हैं. उन्होंने एक आम धारणा पर भी प्रहार किया: "साथ रहने का मतलब यह नहीं कि लोग सेक्स कर रहे हैं और अगर वे ऐसा कर भी रहे हैं, और वे वयस्क हैं, तो यह पूरी तरह से उनकी पसंद है."उनकी यह बात सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन और बहस का केंद्र बनी हुई है.

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया: समर्थन, आलोचना और विचारों का महासंग्राम

इस वीडियो के सामने आते ही X, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्मों पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कुछ लोगों ने पारंपरिक महिला के विचारों को संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के रूप में देखा, तो कुछ ने इसे स्त्री स्वतंत्रता पर हमला कहा. बहुतों ने यह भी तर्क दिया कि लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह के विकल्प के रूप में देखने की बजाय, इसे सहमति पर आधारित आधुनिक साझेदारी के रूप में स्वीकार करना ज़रूरी है.

क्या यह बहस सिर्फ रिश्तों की है या महिलाओं की भूमिका की भी?

यह बहस केवल लिव-इन को लेकर नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की एजेंसी, उनके फैसलों की स्वायत्तता, और भारतीय समाज में बदलते मूल्यों की भी झलक है. इस वीडियो ने इस सवाल को और गहरा किया कि क्या महिलाएं अपनी मर्ज़ी से रिश्ते चुन सकती हैं, और क्या समाज उन्हें इसके लिए कलंकित करने का अधिकार रखता है?

आधुनिकता और परंपरा की टकराहट अब सड़कों पर है

बिहार की सड़कों पर हुआ यह स्ट्रीट इंटरव्यू महज़ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक संघर्ष का प्रतीक बन गया है. यह दिखाता है कि भारत आज भी परंपरा और आधुनिकता के दो सिरों पर खड़ा है और बीच में सबसे ज्यादा खींचतान महिलाओं की स्वतंत्रता और नैतिकता को लेकर हो रही है.

इस बहस का कोई आसान अंत नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आवाज़ें अब दबाई नहीं जा रही हैं, और सोच बदलने की प्रक्रिया खुली बहस से होकर ही निकलेगी.