बिहार के सिवान जिले में एक सब-इंस्पेक्टर और महिला कांस्टेबल से जुड़े विवादित वीडियो के वायरल होने के बाद अब साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं. इस घटना का फायदा उठाते हुए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर कई संदिग्ध लिंक साझा किए जा रहे हैं. साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'वीडियो डाउनलोड' करने के नाम पर फैलाए जा रहे ये लिंक दरअसल फिशिंग स्कैम (Phishing Scam) हैं, जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की निजी और वित्तीय जानकारी चुराना है.
कैसे काम कर रहा है यह फिशिंग जाल?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर इस वायरल वीडियो के नाम पर लुभावने कैप्शन के साथ लिंक शेयर किए जा रहे हैं. जैसे ही कोई उपयोगकर्ता इन लिंक्स पर क्लिक करता है, उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जाता है. यहां अक्सर वीडियो देखने के लिए 'एक्सेस' मांगा जाता है या किसी फाइल को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है. यह फाइल वास्तव में एक 'मालवेयर' होती है जो फोन या कंप्यूटर का कंट्रोल अपराधियों को दे सकती है.
धत् तेरी की... रघुनाथ पुर थाने के अंदर जो बिहार में पड़ता है एक दरोगा 112 ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिस के साथ एकांत कमरे में मशीन गन चलाना सिखा रहा था। इसी दौरान किसी ने दरोगा और महिला पुलिसकर्मी की वीडियो रिकॉर्ड कर वायरल कर दिया।
वीडियो पुलिस कप्तान "पुरन झां" के पास पहुंची… pic.twitter.com/RBENyeDtfY
— Annuश्री (@annushreex) April 22, 2026
निजी डेटा और बैंक खातों पर खतरा
साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार, इन संदिग्ध लिंक्स के जरिए अपराधी उपयोगकर्ताओं के गैलरी एक्सेस, कॉन्टैक्ट्स और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स तक पहुंच बना सकते हैं. कई मामलों में, इन लिंक्स पर क्लिक करने के बाद मोबाइल में ऐसे ऐप्स बैकग्राउंड में इंस्टॉल हो जाते हैं जो ओटीपी (OTP) को ट्रैक कर सकते हैं. इससे उपयोगकर्ताओं को भारी वित्तीय नुकसान होने की संभावना रहती है.
घटना का बैकग्राउंड और पुलिस की कार्रवाई
यह पूरा मामला सिवान में एक सब-इंस्पेक्टर और महिला कांस्टेबल के कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाने के बाद शुरू हुआ. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि, इसी विवाद की आड़ में साइबर ठगों ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है.
बचाव के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
विशेषज्ञों ने नागरिकों को कुछ सुरक्षा उपायों को अपनाने की सलाह दी है:
किसी भी अपरिचित स्रोत से प्राप्त लिंक पर क्लिक न करें.
सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले 'लीक' या 'वायरल' वीडियो के दावों से बचें.
अपने मोबाइल में एक विश्वसनीय एंटी-वायरस का उपयोग करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्षम रखें.
यदि आप किसी ऐसे लिंक का शिकार हुए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर '1930' पर संपर्क करें.













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