Badlapur School Assault Case: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, बदलापुर मामले में पीड़ित बच्चियों की 10वीं तक की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी
महाराष्ट्र सरकार ने बदलापुर मामले की दोनों नाबालिग पीड़ित बच्चियों को बड़ी राहत दी है. स्कूली शिक्षा विभाग ने एक विशेष निर्णय लेते हुए दोनों बच्चियों की कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है. इसके लिए आधिकारिक शासनादेश (GR) भी जारी कर दिया गया है.
Badlapur School Assault Case: महाराष्ट्र सरकार के स्कूली शिक्षा और खेल विभाग ने बदलापुर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की दोनों नाबालिग पीड़ित बच्चियों को सामाजिक और शैक्षणिक संबल देने के लिए एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने 'एक विशेष मामले' के रूप में दोनों बच्चियों की कक्षा 10वीं तक की शिक्षा के प्रवेश शुल्क (एडमिशन फीस) का पूरा खर्च खुद वहन करने का निर्णय लिया है. स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे की विशेष पहल पर यह निर्णय नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ठीक पहले लिया गया है, जिससे पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है.
14 मई को आधिकारिक शासनादेश जारी
महाराष्ट्र सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग ने 14 मई 2026 को इस संबंध में एक आधिकारिक शासनादेश (GR) जारी किया है. अगस्त 2024 में बदलापुर के एक स्कूल में हुई अनुचित घटना के बाद से ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा को लेकर मांग उठ रही थी. यह भी पढ़े: Badlapur Adarsh School Sexual Assault Case: बदलापुर यौन शोषण के आरोपी Akshay Shinde का एनकाउंटर, पुलिस के साथ हुई मुठभेड़
इस नए आदेश के तहत दोनों बच्चियों की कक्षा 1st से 10th तक की पूरी फीस सरकार भरेगी. इसके अलावा, दूसरी पीड़ित बच्ची की सीनियर केजी (Senior KG) की प्रलंबित फीस का भुगतान भी सरकार द्वारा किया जाएगा.
RTE के तहत सीधे स्कूलों को भेजा जाएगा फंड
इस पूरी योजना के तहत होने वाले शैक्षणिक खर्च को 'बालकों का मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE) के अंतर्गत शामिल किया गया है. यह राशि संबंधित शैक्षणिक वर्ष के दौरान सीधे स्कूलों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी.
इस निर्णय पर बात करते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि बदलापुर की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पूरे समाज को आहत करने वाली थी. इन मासूम बच्चियों को केवल कानूनी न्याय दिलाना ही हमारा कर्तव्य नहीं है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करना भी हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सरकार एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए दोनों बच्चियों के साथ मजबूती से खड़ी है ताकि आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.
प्रशासनिक प्रक्रिया को बनाया गया सरल
पीड़ित परिवारों को किसी भी तरह की प्रशासनिक परेशानी या कागजी कार्रवाई की जटिलताओं से बचाने के लिए फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है. इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर सौंप दी गई है.
तय प्रक्रिया के अनुसार, ठाणे जिला परिषद के संबंधित प्राथमिक शिक्षा अधिकारी इस शुल्क से जुड़ा प्रस्ताव पुणे स्थित प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजेंगे. शिक्षा निदेशक से मंजूरी मिलते ही जिला परिषद के माध्यम से फीस की राशि सीधे संबंधित स्कूलों को जारी कर दी जाएगी.
भविष्य के लिए स्थायी नीति पर विचार
राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील कदम की सभी स्तरों पर सराहना की जा रही है. इस बीच, मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के शिकार होने वाले बच्चों की मदद के लिए एक स्थायी नीति (Permanent Policy) बनाने पर भी विचार कर रही है. इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव वर्तमान में शासन के विचाराधीन है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2026 11:53 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

