Fact Check: 'महागठबंधन के प्रोटेस्ट में पप्पू यादव का हुआ अपमान, फूट-फूट कर रोए'? पुराना VIDEO वायरल कर फैलाई जा रही है अफवाह, जानें सच्चाई

Fact Check: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव हाल में हुए 'बिहार बंद' के दौरान अपमानित होकर रो पड़े. दावा किया गया कि उन्हें राहुल गांधी की गाड़ी पर चढ़ने से रोका गया और वे इस अपमान से आहत होकर भावुक हो गए. लेकिन जब इस वायरल वीडियो की पड़ताल की गई, तो सच्चाई कुछ और ही निकली. दरअसल, यह वीडियो अभी का नहीं बल्कि साल 2018 का है. इस वीडियो की असली सच्चाई एक रिवर्स इमेज सर्च के जरिए सामने आई, जिसमें यह पाया गया कि यह वीडियो 6 सितंबर 2018 को 'Headlines India' नाम के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया था.

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'बिहार जनसभा में बेइज्जत होने के बाद पप्पू यादव रोते हुए'

एक सांसद इस तरीके से क्यों रो रहा है?

 

6 साल पुराना वीडियो हो रहा वायरल

क्या है पूरा मामला?

इस पुराने वीडियो में देखा जा सकता है कि पप्पू यादव उस वक्त मुजफ्फरपुर जा रहे थे, जब उन्हें ‘भारत बंद’ के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस घटना में पप्पू यादव पर कोई हमला नहीं हुआ था, बल्कि उन्हें सिर्फ रास्ता बदलने के लिए कहा गया था. पप्पू यादव उस घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गए थे. यही क्लिप अब वायरल की जा रही है.

मुजफ्फरपुर की SSP (उस समय की) हरप्रीत कौर ने भी पुष्टि की थी कि कोई हमला नहीं हुआ था, केवल उनकी सुरक्षा गार्ड और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की-फुल्की कहासुनी हुई थी.

क्यों वायरल हुआ फर्जी वीडियो

अब बात करें मौजूदा वायरल दावे की तो 9 जुलाई 2025 को महागठबंधन के ‘बिहार बंद’ प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की यात्रा को लेकर कई वीडियो वायरल हुए. इन्हीं में से एक क्लिप में पप्पू यादव के कथित 'अपमान' का दावा किया गया. इस पर खुद पप्पू यादव ने सफाई दी है. उन्होंने कहा, "मैं गिर गया था और मुझे चोट लग गई थी. वहां हर पार्टी का एक-एक नेता था. ये कोई अपमान नहीं है. लोग जो समझना चाहें वो समझें. जनता से बड़ा कोई नहीं, उनके लिए एक बार नहीं, लाख बार अपमान झेलने को तैयार हूं."

इस बयान से स्पष्ट है कि पप्पू यादव ने वायरल दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि ये अफवाहें फैलाई जा रही हैं और वीडियो का गलत संदर्भ दिया गया है.

निष्कर्ष

वायरल वीडियो नया नहीं है और राहुल गांधी की रैली से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह 2018 का वीडियो है जिसे वर्तमान घटनाक्रम से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है.