Tejas Jet Crash: ट्रेनिंग के दौरान क्रैश हुआ IAF का लड़ाकू तेजस विमान, पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल

मुंबई: भारतीय वायु सेना (IAF) का एक स्वदेशी 'तेजस' लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. राहत की बात यह रही कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से ठीक पहले पायलट सुरक्षित रूप से इजेक्ट (Eject) करने में सफल रहा. जानकारी के अनुसार, यह हादसा एक प्रमुख एयरबेस पर लैंडिंग के प्रयास के दौरान हुआ. हालांकि पायलट की स्थिति स्थिर है, लेकिन विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया है.

कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश

भारतीय वायु सेना ने इस गंभीर हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' (Court of Inquiry) के आदेश दिए हैं. जांच दल इस बात की पुष्टि करेगा कि हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या फिर यह एक मानवीय चूक थी. एहतियात के तौर पर, प्रशासन ने पूरे तेजस बेड़े के व्यापक तकनीकी निरीक्षण के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी संभावित सिस्टमैटिक फॉल्ट की पहचान की जा सके. यह भी पढ़े: Kanpur Lamborghini Crash: कानपुर लेम्बोर्गिनी हादसे में CCTV ने खोली पोल, वकील के दावे को पुलिस ने किया खारिज; कार कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा ही चला रहा था; VIDEO

तेजस के लिए चिंता का विषय

यह दुर्घटना पिछले दो वर्षों में तेजस कार्यक्रम से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना है. इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास एक तेजस विमान क्रैश हुआ था. इसके बाद नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान एक दुखद हादसे में एक पायलट की जान चली गई थी. सुरक्षा के रिकॉर्ड को देखते हुए, लगातार हो रहे ये हादसे स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म की परिचालन विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम और चुनौतियां

तेजस, जिसे "तेज" या "दीप्ति" के रूप में जाना जाता है, भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसे पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है. वर्तमान में वायु सेना उन्नत तेजस Mk1A वेरिएंट की डिलीवरी का इंतजार कर रही है, जिसके लिए 180 विमानों का ऑर्डर दिया गया है. हालांकि, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में उत्पादन की गति इंजन डिलीवरी और सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण धीमी रही है.

रणनीतिक महत्व और भविष्य की योजनाएं

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस जांच के नतीजे तेजस Mk1A के भविष्य के रोलआउट के लिए महत्वपूर्ण होंगे. यदि जांच में कोई तकनीकी खामी पाई जाती है, तो नए वेरिएंट्स के शामिल होने में और देरी हो सकती है. फिलहाल, वायु सेना अपनी स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के लिए इस प्लेटफॉर्म के प्रति प्रतिबद्ध है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच वायु श्रेष्ठता बनाए रखना अनिवार्य है.