West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा किए जाने से महज कुछ घंटे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और हिंदू पुरोहितों के मासिक मानदेय (Honorarium) में 500 रुपये की वृद्धि करने का एलान किया है. इस फैसले को चुनाव से पहले विभिन्न समुदायों को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि राज्य सरकार आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में योगदान देने वाले इन धर्मगुरुओं के सम्मान और सहायता के लिए यह कदम उठा रही है. यह भी पढ़े: Assembly Elections 2026 Date Announcement Live Streaming: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के लिए चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस, यहां देखें लाइव
मानदेय में संशोधन: अब किसे कितना मिलेगा?
राज्य सरकार के इस नए फैसले के बाद संशोधित मानदेय दरें 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की संभावना है. बढ़ोतरी के बाद नया ढांचा कुछ इस प्रकार होगा:
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इमाम: पहले इन्हें 2,500 रुपये मिलते थे, जो अब बढ़कर 3,000 रुपये हो जाएंगे.
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मुअज्जिन: इनका मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है.
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पुरोहित: सनातन धर्म के गरीब पुरोहितों को मिलने वाली 1,000 रुपये की सहायता राशि अब 1,500 रुपये होगी.
'सबका साथ' का संदेश और विपक्ष का हमला
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करती है और सभी धार्मिक परंपराओं को मजबूत करना चाहती है. उन्होंने यह भी बताया कि पुरोहितों और मुअज्जिनों द्वारा जमा किए गए सभी नए आवेदनों को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है.
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस समय पर की गई घोषणा को "चुनावी स्टंट" करार दिया है. भाजपा और वामपंथी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले ऐसी घोषणाएं केवल वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए की जा रही हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और चुनाव की तैयारी
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों के लिए आज शाम चुनाव की तारीखों का एलान होना है. 2021 के चुनावों से पहले भी ममता सरकार ने 8,000 से अधिक पुरोहितों के लिए मासिक वित्तीय सहायता और मुफ्त आवास की घोषणा की थी. बंगाल में करीब 30 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता और बड़ी संख्या में ग्रामीण हिंदू आबादी है, जिन्हें रिझाने के लिए तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही लगातार प्रयास कर रही हैं.
इस घोषणा के साथ ही बंगाल में राजनीतिक पारा चढ़ गया है. अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की घोषणा पर हैं, जिसके बाद राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी और किसी भी नई सरकारी योजना या वित्तीय लाभ की घोषणा पर रोक लग जाएगी.












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