PM मोदी का फर्जी AI वीडियो बनाकर दुकान का किया प्रमोशन, क्या यह कानूनी है? इंटरनेट पर छिड़ी बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI जनरेटेड वीडियो (Photo: Instagram/ ayshamysha_)

नई दिल्ली, 6 सितंबर: दिल्ली के एक लेडीज़ फैशन स्टोर ने अपनी दुकान का प्रचार करने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया, जिस पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. "आयशा मायशा" नाम के इस स्टोर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें यह दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनकी लाजपत नगर वाली दुकान पर आए थे.

3 सितंबर को पोस्ट किए गए इस वीडियो में दिखाया गया है कि पीएम मोदी दुकान में दाखिल हो रहे हैं, मालिक से हाथ मिला रहे हैं और फिर शॉपिंग बैग लेकर बाहर जा रहे हैं. वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "हमारे प्रिय और सम्माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने आयशा मायशा दुकान का दौरा किया."

यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया, लेकिन जल्द ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी सच्चाई और कानूनी वैधता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. कई लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि यह वीडियो असली नहीं, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है. इसके बाद इस बात पर बहस छिड़ गई कि क्या किसी बड़े पब्लिक फिगर की पहचान का इस्तेमाल इस तरह से व्यावसायिक प्रचार के लिए करना नैतिक रूप से सही है.

लोगों ने उठाए AI कंटेंट की वैधता पर सवाल

जैसे ही वीडियो फैला, लोगों ने इसे पर्सनालिटी राइट्स और प्राइवेसी कानूनों का उल्लंघन बताया. एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने लिखा, "AI अब हद से बाहर जा रहा है. क्या यह कानूनी भी है @DelhiPolice?". एक अन्य यूजर ने जब इस बारे में xAI के Grok से पूछा तो जवाब मिला कि भारत में किसी पब्लिक फिगर का चेहरा बिना इजाजत के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए AI से बनाना पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन हो सकता है. हालांकि, डीपफेक पर अभी तक कोई खास कानून नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है.

AI को लेकर पारदर्शिता और नियमों की मांग

इस वीडियो ने AI से बनाए गए कंटेंट के लिए सख्त नियम और पारदर्शिता की मांग को फिर से हवा दे दी है. कई यूजर्स ने सुझाव दिया कि AI से बनाए गए हर वीडियो या फोटो पर एक वॉटरमार्क या डिस्क्लेमर होना अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिससे साफ पता चले कि यह असली नहीं है.

एक यूजर ने लिखा, "AI से बनी हर चीज़ पर वॉटरमार्क होना चाहिए कि यह AI से बना है." वहीं एक और यूजर ने कहा, "भारत को एक AI एक्ट की जरूरत है; किसी को भी आपकी इजाजत के बिना आपका चेहरा इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होना चाहिए."

कुल मिलाकर, इस फैशन स्टोर को भले ही इस वीडियो से थोड़ी देर के लिए सुर्खियां मिल गईं, लेकिन इसने AI के नैतिक और कानूनी पहलुओं पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है. जैसे-जैसे AI टूल्स आम लोगों के लिए आसान होते जा रहे हैं, इसके गलत इस्तेमाल को रोकने और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त नियमों और पारदर्शिता की जरूरत और बढ़ गई है.