World Youth Skills Day 2025: भारत में स्किल इंडिया मिशन! क्या हैं उपलब्धियां और कितनी हैं संभावनाएं?

  प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई को दुनिया भर में विश्व युवा कौशल दिवस मनाया जाता है. देश के विकास में युवाओं की भागीदारी के महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा कि युवा वर्ग का शैक्षिक विकास ही काफी नहीं, बल्कि उसकी शिक्षा में उसके कौशल्य का होना भी जरूरी है. इसी बात को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 15 जुलाई 2014 से विश्व युवा कौशल दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे अधिकांश देशों की पुरजोर सहमति मिली. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले जिससे रोजगार एवं उद्यमिता की पुरजोर संभावना हो. विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर यहां हम भारत में स्किल इंडिया मिशन की उपलब्धियों एवं संभावनाओं की बात करेंगे.

स्किल इंडिया (Skill India) मिशन

 स्किल इंडिया मिशन ने शुरुआत से अब तक अच्छी सफलता हासिल की है. इसके जरिये करोड़ों युवाओं को कौशल प्रशिक्षणप्रमाणनडिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक अवसर मिले हैंलेकिन चुनौतिया भी उतनी ही वास्तविक हैं. मसलन प्रशिक्षण की गुणवत्ताक्षेत्रीय असमानताएंउद्योग से तालमेल की कमी और प्रशिक्षक‑संकट इत्यादि. ऐसे में कहा जा सकता है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्तिउद्योग सहभागिताडिजिटल अवसंरचना और नीति सुधार की दिशा में सही प्रयास जारी रहेतो Skill India भारत को वैश्विक स्तर पर एक कुशल राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है यह भी पढ़ें : Sawan 2025 Mehndi Designs: भगवान शिव के अतिप्रिय सावन मास में अपने हाथों पर रचाएं मेहंदी, देखें खूबसूरत डिजाइन्स

प्रमुख उपलब्धियां

प्रशिक्षित और प्रमाणित युवाओं की संख्या

विभिन्न सूत्रों के अनुसार प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के अंतर्गत लगभग 1.1 से 1.3 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गयाजबकि कुल स्किल इंडिया के तहत अब तक लगभग 2.5करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिला है.

विस्तृत अवसंरचना और डिजिटल प्लेटफॉर्म

  देश भर में लगभग एक हजार प्रधानमंत्री कौशल केंद्र और करीब 50 इंडिया इंटरनेशनल स्किल केंद्र स्थापित किये गये हैं. इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हुए हैं.

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और रोजगार के अवसर

भारत ने 11 से अधिक देशों के साथ समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) किए हैं और विदेशों में भारतीय युवाओं की नियुक्ति को बढ़ावा दिया है.

लैंगिक समावेशन और ग्रामीण विकास

लगभग 40 प्रश लाभार्थी महिलाएं हैं. शुल्क भुगतान के बिना (DDU)  ग्रामीण कौशल्य योजना (GKU) एवं पूर्व शिक्षा की मान्यता (RPL) जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण एवं अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों का रूपांतरण हुआ है.

मुख्य चुनौतियां

प्रशिक्षण स्तर और गुणवत्ता में कमी

देश के तमाम प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक उपकरण, योग्य प्रशिक्षक और पाठ्यक्रमों आदि की कमी है और मानकीकरण का अभाव है.

* रोज़गार‑कौशल अनुपात की असंगति के कारण कई प्रशिक्षण पाठ्यक्रम वास्तविक उद्योग की मांग से मेल नहीं खातेजिससे प्लेसमेंट दरें (मात्र 20 से 22 प्रश) कम होती हैं.

भौगोलिक व समावेशन देरी

ग्रामीणपिछड़ेमहिला और अन्य वंचित वर्गों में जागरूकता व पहुंच सीमित है. प्राप्त सूत्रों के अनुसार केवल 47 प्रश स्कूलों में ही स्किल बेस्ड पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं और केवल 29 प्रश छात्र भाग लेते हैं.

* क्वालिटी प्रशिक्षकों की कमीमानकीकृत मूल्यांकन का अभावएवं जाली प्रमाणन (fake-certification)

मॉनिटरिंग एवं डेटा‑फीडबैक की कमी

* एकीकृत राष्ट्रीय डाटा ट्रैकिंग न होने से नीति निर्णय प्रभावित होते हैं.

नवीन व उभरती तकनीकी कौशल की कमी

डिजिटल एवं AI क्षेत्रों में करीब 150 मिलियन श्रमिकों को पुन: प्रशिक्षण की आवश्यकता है.

सुधार की संभावनाएं एवं सुझाव

* उद्योग‑शिक्षा साझेदारी मजबूत करें

* विश्वविद्यालयों तथा ट्रेनिंग संस्थानों में कम से कम 10 प्रतिशत कार्यक्रम उद्योगों के साथ साझेदारी में हों

* डिजिटल और AI‑आधारित कौशल पर जोर

* प्रधानमंत्री कौशल्य विकास योजना 4.0, अप्रेंटिसशिप मेंलों, रिन्यूबल एनर्जी, AI, ड्रोन ऑपरेशन जैसे नए क्षेत्रों को शामिल कर प्रशिक्षण सेट को अपडेट करना

* मॉनिटरिंग एवं फीडबैक प्रणाली को सुदृढ़ बनाएं.

* श्रम बाजार सूचना प्रणाली (Labour market information systems) स्थापन करें ताकि रियल टाइम डिमांड के अनुसार प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार हो सके.

* ग्रामीणमहिला व पिछड़े वर्गों तक पहुँच बढ़ाएं

* स्टार्ट‑अप क्षेत्र में उद्यमिता बढ़ावा दें.