Cervical Cancer के खिलाफ मोदी सरकार की बड़ी जंग, रोकथाम के लिए भारत में 4-15 साल की बच्चियों को मुफ्त HPV वैक्सीन देने की तैयारी; रिपोर्ट
भारत सरकार सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए 14-15 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू कर रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह टीका सरकारी केंद्रों पर पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होगा.
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Cervical Cancer Prevention: भारत सरकार देश में महिलाओं में होने वाले कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक, सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रही है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत मुख्य रूप से 14 से 15 वर्ष की आयु की लड़कियों को लक्षित किया जाएगा. उन्हें बिना किसी शुल्क के स्वैच्छिक रूप से एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन की एक एकल खुराक (Single-dose) दी जाएगी. फरवरी 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से शुरू होने वाले इस अभियान का उद्देश्य उस बीमारी को जड़ से खत्म करना है, जिससे भारत में सालाना 42,000 से अधिक महिलाओं की जान जाती है.
यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत मिलेगी सुविधा
यह राष्ट्रव्यापी अभियान केंद्र सरकार के 2024 के बजट में किशोरियों के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से ही सीमित स्तर पर ऐसी पहल शुरू हो चुकी है, लेकिन अब नए केंद्रीय दिशानिर्देशों के तहत इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम' (UIP) के तहत लाया जाएगा. वर्तमान में निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन की कीमत 3,000 से 10,000 रुपये के बीच है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर इसे मुफ्त कर देने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए यह सुरक्षा सुलभ हो जाएगी. यह भी पढ़े: National Cancer Awareness Day 2025: क्या है भारत में कैंसर जागरूकता की स्थिति और चुनौतियां? जानें इस वर्ष की थीम एवं कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स
सिंगल-डोज दृष्टिकोण को दी गई मंजूरी
इस अभियान की एक प्रमुख विशेषता 'सिंगल-डोज' (एकल खुराक) पद्धति को अपनाना है. पारंपरिक रूप से इसके लिए दो या तीन खुराक की आवश्यकता होती थी, लेकिन टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस आयु वर्ग के लिए एकल खुराक दृष्टिकोण को प्रभावी माना है. वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि वायरस के संपर्क में आने से पहले दी गई एक खुराक भी शरीर को मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा प्रदान करती है. इससे लॉजिस्टिक चुनौतियां कम होंगी और कम लागत में अधिक आबादी को कवर किया जा सकेगा.
वैक्सीन की आपूर्ति और स्वदेशी विकल्प
वैक्सीन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने 'गावी' (Gavi- वैक्सीन एलायंस) के साथ साझेदारी की है, जिसके माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली 'गार्डासिल' (Gardasil) वैक्सीन प्राप्त की जाएगी. यह वैक्सीन एचपीवी के उन चार प्रमुख स्ट्रेन से सुरक्षा देती है जो दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार हैं. इसके साथ ही, सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित भारत की पहली स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन 'सर्वावैक' (CERVAVAC) के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य में वैक्सीन की उपलब्धता और सस्ती हो सकेगी.
सुरक्षा और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन
टीकाकरण अभियान विशेष रूप से नामित सरकारी केंद्रों, जैसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में चलाया जाएगा. सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए हर केंद्र पर प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी तैनात होंगे.
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डिजिटल ट्रैकिंग: पूरी प्रक्रिया को 'U-WIN' पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे परिवार डिजिटल रूप से टीकाकरण की स्थिति को ट्रैक कर सकेंगे.
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जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह टीका पूरी तरह स्वैच्छिक है. इसके लाभ बताने और भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे.
वैश्विक लक्ष्य की ओर एक कदम
दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर के कुल बोझ का लगभग पांचवां हिस्सा भारत में है. वैश्विक डेटा से पता चला है कि जिन देशों ने राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण लागू किया है, वहां इस कैंसर के मामलों में 90% तक की कमी आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि 14-15 वर्ष की आयु वर्ग को लक्षित करके भारत 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 24, 2026 03:59 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

