सोशल मीडिया पर अपने एक्स के पोस्ट देखना आम बात लग सकती है. लेकिन रिसर्च कहती है कि ऐसा बार-बार करने से तकलीफ बढ़ती है, उनकी याद सताती है और आगे बढ़ना और कठिन हो जाता है.ब्रेकअप के बाद यह अक्सर होता है कि रिश्ता खत्म होने के बाद लोग फोन पर ज्यादा समय बिताने लगते हैं और कई कई बार अपने एक्स की सोशल मीडिया प्रोफाइल चेक करने लगते हैं. वो किसके साथ हैं? कैसे हैं? क्या वो इस रिश्ते से आगे बढ़ गए हैं? हालांकि, कई लोगों को यह काफी मामूली लग सकता है कि भला इससे क्या नुकसान होगा. बल्कि कुछ लोग तो मानते हैं कि इससे मदद ही मिलती है. उन्हें लगता है कि इससे उनके पास अपडेट रहेगा, मन को थोड़ी शांति मिलेगी और इस इमोशनल झटके के बाद खुद को संभालने में मदद मिलेगी.
लेकिन पिछले दस सालों में मनोवैज्ञानिक रिसर्च ने इसका एक अलग ही पहलू सामने लाया है. बार-बार अपने पुराने साथी का सोशल मीडिया देखना दिल के दर्द को कम नहीं करता बल्कि उसे लगातार जिंदा रखता है.
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अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, जोआन डेविला कहती हैं, "अपने एक्स को ऑनलाइन देखते रहने से आप अपने दिमाग में उन यादों और भावनाओं के कनेक्शन को और मजबूत कर रहे होते हैं, जबकि आपको उन्हें धीरे-धीरे कमजोर करना चाहिए.”
ब्रेकअप के बाद एक्स को देखते रहने पर साइंस क्या कहता है
साइबर-साइकोलॉजी और ह्यूमन बिहेवियर से जुड़ी रिसर्च बताती हैं कि सोशल मीडिया पर एक्स पार्टनर को बार-बार देखना (या स्टॉक करना) ब्रेकअप के बाद भावनात्मक रूप से बाहर निकलने में मुश्किलें बढ़ा देता है. इससे तनाव बढ़ता है, एक्स की याद आती है और इंसान की पर्सनल ग्रोथ भी कम हो जाती है.
अमेरिका के इंडियाना राज्य की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी प्रोफेसर, मिशेल ड्रूइन कहती हैं, "यह इस ओर इशारा देता है कि आप अभी भी अपने एक्स को पूरी तरह छोड़ नहीं पाए हैं. इससे रिकवरी धीमी हो जाती है और भावनात्मक तकलीफ या पुराने पार्टनर के साथ जुड़ाव और गहरा होता चला जाता है.”
हालांकि, भावनात्मक तकलीफ अक्सर लोगों को अपने एक्स का सोशल मीडिया चेक करने के लिए मजबूर कर देती है. लेकिन ऐसा करना उस दर्द को खत्म करने के बजाय उसे जिंदा रखने में मदद करता है. इन सबके बावजूद इसे रोकना मुश्किल होता है, क्योंकि इंसान की फितरत है, जानकारी ढूंढना और ब्रेकअप के बाद अचानक बहुत सारे सवालों का पहाड़ खड़ा हो जाता है.
ड्रूइन ने बताया, "सवालों का जवाब ढूंढने वालों के लिए इंटरनेट एक मुश्किल जगह बन जाती है. वहां हम कुछ भी देख सकते हैं, ‘मेरा एक्स क्या कर रहा है? क्या वो मूव ऑन कर चुका है?'”
ड्रूइन कहती हैं कि हम ये सब जानना चाहते हैं, लेकिन असल में ये सब जानकारी मिलने से हमारा आगे बढ़ने और ज्यादा मुश्किल हो जाता है. चूंकि, ब्रेकअप के बाद दिमाग का "अटैचमेंट सिस्टम” एक्टिव हो जाता है. डेविला कहती हैं, "जब हम खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, तो यह सिस्टम काम करने लगता है. एक्स को ऑनलाइन देखना भी एक तरह का अटैचमेंट बिहेवियर ही है,” ऐसा खासकर उन लोगों में होता है, जिन्हें छोड़ दिया गया हो.
अपने पुराने साथी की प्रोफाइल चेक करना वैसा ही है, जैसे अकेलापन या असुरक्षित महसूस होने पर किसी जानी-पहचानी चीज या इंसान की तरफ हाथ बढ़ाना. इससे थोड़ी देर के लिए सुकून जरूर मिल सकता है, लेकिन असल में भावनात्मक तकलीफ को ठीक करने में यह ज्यादा मददगार साबित नहीं होता.
सोशल मीडिया कैसे ‘डोपामीन लूप' बना देता है
सोशल मीडिया हमारे दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम का फायदा उठाता है. ड्रूइन कहती हैं, "जब आप कुछ नया देखते हैं, तो दिमाग में डोपामिन का एक लूप शुरू हो जाता है. ऐसा लगता है कि आपके पास थोड़ा-बहुत कंट्रोल है.”
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चाहे वो कोई नई फोटो हो, किसी नई जगह का टैग, या कोई रहस्यमय कैप्शन, ये सब दिमाग को थोड़ी देर के लिए ऐसा महसूस कराते हैं जैसे आपको सब पता चल गया है और आप हालात पर काबू पा रहे हैं. लेकिन अगर इसे कंट्रोल में न रखा जाए, तो ये एंग्जायटी या ओसीडी (ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर) का रूप ले सकता है.
डेविला कहती हैं, "लोग देखते हैं और अच्छा महसूस करते है. लेकिन फिर जब वही बेचैनी लौट आती है, तो वे फिर से चेक करना चाहते हैं.”
इस तरह के चक्कर में फंसकर लोग अपनी भावनाओं को सही तरह से समझ और प्रोसेस नहीं कर पाते हैं. डेविला कहती हैं कि तनाव में लोग चीजों को खुद को नुकसान पहुंचाने वाले तरीके से ही समझते हैं. इससे दिल को सुकून मिलने के बजाय एक्स की याद और गहरी होती चली जाती है.
ब्रेकअप के बाद हेल्दी रहने के लिए टिप्स
आमतौर पर कोई भी रिश्ता साफ-सुथरे तरीके से खत्म नहीं होता, खासकर सोशल मीडिया के दौर में, जहां पुरानी यादें और कहानियां हमेशा अधूरी-सी बनी रहती हैं.
इसलिए सबसे पहला कदम होना चाहिए कि आप अपने लिए उस कहानी को खत्म करें. इसका मतलब हुआ कि अपने एक्स को बार-बार स्टॉक करना बंद करने की कोशिश करें. उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल बार-बार न देखें, ताकि आपके पुराने भावनात्मक रिश्ते धीरे-धीरे कमजोर हो सकें. या फिर कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी भी बना सकते हैं. ड्रूइन कहती हैं, "रिसर्च बताती है कि अगर आप खुद को 30 दिनों तक सोशल मीडिया से दूर रखते हैं, तो ये एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स जैसा होता है.”
फिर, कुछ बिल्कुल अलग करने की कोशिश करें. डेविला कहती हैं, "वर्कआउट करें, टहलने जाएं, किसी दोस्त को कॉल करें.” अपना ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने से तनाव को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
और ब्रेकअप को नए "नजरिए” से देखें. डेविला कहती हैं, "अगर ब्रेकअप हुआ है, तो शायद वो रिश्ता आपके लिए सही था ही नहीं.” उनके मुताबिक, ब्रेकअप सिर्फ एक अंत नहीं है, बल्कि यह एक मौका भी है ताकि आप भविष्य में एक हेल्दी और बेहतर रिश्ते में जा सकें.












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