मोती (Pearl) एक कठोर पदार्थ है, जो नरम टिश्यू वाले समुद्री जीवों द्वारा पैदा किया जाता है. स्टैंडर्ड मोती पूर्णतः गोल और चिकनी होती है. हालांकि ये अलग-अलग शेप में भी मिलते हैं. पुरुषवर्ग जहां मोती की अंगूठी (Pearl Ring) पहनना पसंद करता है, वहीं स्त्रियां अंगूठी के अलावा इसे आभूषण (Pearl Jewellery) के तौर पर भी धारण करती हैं. मोती वास्तव में रत्न या आभूषण नहीं बल्कि एक जैविक संरचना है. हालांकि इसकी गिनती नवरत्नों की श्रेणी में की जाती है. वास्तव में मोती मुख्य रूप से चन्द्रमा का रत्न है.
अन्य चमत्कारिक पत्थरों के मुकाबले मोती की मांग ज्यादा भी है और इसकी वजह यह है कि यह अपेक्षाकृत सस्ती तो होती ही है, लेकिन कुछ लोगों की यह धारणा होती है कि मोती नुकसान नहीं पहुंचाती. जबकि प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित रवींद्र पाण्डेय का मानना है कि नकली अथवा त्रुटिपूर्ण मोती आपको विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचा सकते हैं.
किसे पहनना चाहिए मोती
मोती, चन्द्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है. आपकी कुंडली में यदि चंद्र शुभ प्रभाव में हो तो मोती अवश्य धारण करना चाहिए. चन्द्रमा मनुष्य के मन को दर्शाता है, और इसका प्रभाव पूर्णतया हमारी सोच पर पड़ता है. मन की स्थिरता को कायम रखने में मोती अत्यंत लाभ दायक सिद्ध होता है. इसके धारण करने से मात्री पक्ष से मधुर सम्बन्ध तथा लाभ प्राप्त होते है. मोती धारण करने से आत्म विश्वास में वृद्धि भी होती है. हमारे शरीर में द्रव्य से जुड़े रोग भी मोती धारण करने से नियंत्रित किये जा सकते है जैसे ब्लड प्रशर और मूत्राशय के रोग , लेकिन इसके लिए अनुभवी ज्योतिष की सलाह लेना अति आवशयक है, क्योकि कुंडली में चंद्र अशुभ होने की स्तिथि में मोती नुकसानदायक भी हो सकता है. यह भी पढ़ें: क्या बलि प्रथा पर लगाम लगाने के लिए नारियल फोड़ने की परंपरा की हुई शुरुआत, जानें इसकी वास्तविकता
असली मोतियों की यूं करें पहचान
- मोती श्वेत और चमकदार होना चाहिए.
- इसमें किसी भी अन्य रंग या पीलेपन की झलक नहीं होनी चाहिए.
- मोती हाथ में लेंगे तो उसका वजन महसूस नहीं होना चाहिए. शुद्ध मोती हमेशा वजनहीन लगता है.
- असली मोती दांत से कसकर दबाने से टूट जाते हैं.
- असली मोती कपड़े से रगड़ने पर उसकी चमक बढ़ जाती है.
- असली मोती को नाखुन से खुरचने पर उसकी परतें उखड़ सकती हैं.
8 प्रकार के होते हैं मोती
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल आठ प्रकार के मोती होते हैं. ये हैं अभ्र मोती, शंख मोती, शुक्ति मोती, सर्प मोती, गज मोती, बांस मोती, शूकर मोती और मीन मोती.
ये सभी मोती हर किसी के लिए नहीं बने होते हैं. यह कुण्डली में मौजूद चंद्रमा की स्थिति, उसकी ताकत और व्यक्ति के लग्नानुसार पहनाए जाते हैं. आपको कौन सा मोती सूट करेगा अथवा लाभ पहुंचाएगा, यह जानने के लिए भी किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह-मशविरा कर लें तो बेहतर होगा.
नकली मोतियों से संभावित नुकसान
आजकल बाजार में भारी तादाद में नकली मोती मिलते हैं. दोषपूर्ण मोती मनुष्य को हानि पहुंचाता है. दोषपूर्ण मोतियों में चमक नहीं होती. इसे धारण करने से दरिद्रता बढती है, इसके विपरीत त्रुटिपूर्ण अथवा चिटके हुए मोती जीवन में अस्थिरता लाते हैं. जिस मोती के चारों ओर गोलाकार रेखा दिखाई देती है, वह ह्रदय को कमजोर और व्यक्ति विशेष को भीतर से कमजोर बनाती है. जिस मोती पर रंगीन धब्बे दिखायी देते हैं, वह आपके बल और बुद्धि को प्रभावित कर सकते हैं. बेडौल एवं लंबे आकार की मोती भी बल-बुद्धि को नुकसान पहुंचाती है. रक्त जैसे लाल रंगत लिए हुए मोती सबसे खतरनाक माने जाते हैं. इनका बुरा प्रभाव पूरे कुल पर पड़ सकता है. इसी तरह काले धब्बे वाले मोती भी नुकसानदेह साबित होते हैं.
किसे पहनना चाहिए मोती
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सफेद रत्न यानी मोती चंद्रमा की अशुभता को दूर करने के लिए धारण किया जाता है. जन्म कुण्डली में यदि चंद्रमा के साथ दुष्ट ग्रह राहु या केतु एक ही भाव में आकर बैठ जाएं तो यह चंद्र ग्रहण बनाता है. इस ग्रहण का जीवन पर अशुभ प्रभाव ना हो इसके लिए भी मोती धारण किया जाता है. इसके अलावा जिस व्यक्ति को बात बात पर गुस्सा आता है, उसे भी छह रत्ती भर का मोती चांदी की अंगूठी में धारण करना चाहिए.
शुद्ध मोती धारण करते समय ध्यान रखें
8 से 15 रत्ती का मोती चांदी की अंगूठी में जड़वा कर धारण करना चाहिए. मोती जड़ित चांदी की अंगूठी को किसी भी सोमवार के दिन धारण करना चाहिए. लेकिन मोती धारण धारण करने से एक रात पहले उसे दूध, गंगाजल, शहद, चीनी के मिश्रण में डालकर रात भर रखें. अगले दिन चंद्रदेव को पांच अगरबत्तियां अथवा धूप बत्तियां प्रज्जवलित करने के पश्चात अपनी कनिष्ठ अंगुली में धारण करें. यह भी पढ़ें: रक्षासूत्र में होती है गजब की आध्यात्मिक शक्ति, जानें कलाई पर मौली बांधने से जुड़े खास नियम
सप्ताह भर में मिल सकता है परिणाम
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रमा की यह अंगूठी धारण करने के 4 से 7 दिन के अंदर-अंदर अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देती है. एक शुद्ध मोती अमूमन 2 साल एक महीना और 27 दिन तक अपना प्रभाव दिखाता है. उसके पश्चात आप उसी चांदी की अंगूठी में नई एवं शुद्ध मोती जड़वाकर पहन सकते हैं. यदि आप यही मोती दोबारा पहन कर लाभ पाना हैं तो इस अंगूठी को गुनगुने पानी में चुटकी भर शुद्ध नमक डालकर रख दें. इससे इस अंगूठी की नकारात्मक शक्ति नष्ट होकर दुबारा लाभ देने वाली स्थिति में आ जायेगी.
नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को प्रचलित मान्यताओं के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है और यह लेखक की निजी राय है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसके बारे में हर व्यक्ति की सोच और राय अलग-अलग हो सकती है.













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