नई दिल्ली: रंगों के महापर्व होली (Holi) से ठीक एक दिन पहले आज, 3 मार्च 2026 को देशभर में होलिका दहन (Holika Dahan) का त्योहार पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व 'छोटी होली' (Chhoti Holi) के रूप में भी जाना जाता है. यह दिन न केवल आसुरी शक्तियों के अंत का प्रतीक है, बल्कि समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश भी देता है. आज रात शुभ मुहूर्त में होलिका प्रज्वलित की जाएगी और इसके अगले दिन लोग एक-दूसरे को रंगों से सराबोर करेंगे.
होलिका दहन के लिए लकड़ियों और गोबर के उपलों (कंडों) से होलिका तैयार की जाती है. भक्त विधि-विधान से पूजा करने के बाद होलिका की सात बार परिक्रमा करते हैं. इस दौरान अग्नि में गेंहू की नई बालियां, नारियल, मिठाई, इलायची और लौंग अर्पित करने की परंपरा है. माना जाता है कि ऐसा करने से न केवल घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि व्यक्ति को उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है और समस्त नकारात्मक ऊर्जा अग्नि में जलकर भस्म हो जाती है.
होलिका दहन पर लोग एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजकर खुशियां साझा करते हैं. ऐसे में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक छोटी होली के अवसर पर आप भी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को इन चुनिंदा हिंदी मैसेजेस, शायरी, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए हैप्पी होलिका दहन कह सकते है, साथ ही इस पर्व की खुशियों को उनके साथ बांट सकते हैं.





होलिका दहन से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा असुर राजा हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रह्लाद की है. प्रह्लाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे, जो उनके पिता को बिल्कुल पसंद नहीं था. हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को मारने का आदेश दिया. होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, इसलिए वह प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई.
हालांकि, श्रीहरि की कृपा से भक्त प्रह्लाद के प्राण सुरक्षित रहे और वरदान का दुरुपयोग करने के कारण होलिका स्वयं उस अग्नि में जलकर राख हो गई. यही कारण है कि यह पर्व हर साल हमें याद दिलाता है कि सत्य और भक्ति की शक्ति के आगे बुराई कभी टिक नहीं सकती.













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