रमजान का पवित्र माह शुरु हो चुका है. इस्लामिक कैलेंडर में रमजान साल के सबसे पवित्र महीनों में एक होता है. मान्यता है कि इस दौरान रोजा (उपवास) रखने और जरूरतमंदों को दान देने वालों को अल्लाह की रहमत प्राप्त होती है. रमजान की तारीख चांद दिखने के आधार पर निर्धारित होती है. बता दें कि इस पवित्र माह को मुसलमान अपनी परंपरा के अनुसार सेलिब्रेट करते हैं. तुर्की में जहां ढोल वादकों की लयबद्ध थाप से सहरी रखने वालों को जगाने की कोशिश होती है, वहीं काहिरा में सड़कों पर जगमगाते लालटेन दिखते हैं. ऐसे में यह जानना रोचक होगा कि दुनिया भर में मुसलमान रमजान को कैसे सेलिब्रेट करते हैं.
संयुक्त अरब अमीरात
संयुक्त अरब अमीरात में 'हक अल लैला' नामक एक परंपरा निभाई जाती है. यह रमजान से एक माह पहले, शाबान के मध्य में शुरू होता है, जब बच्चे पारंपरिक कपड़े पहनकर पड़ोस के घरों में जाते हैं, गीत गाते हैं. इसमें एक लोकप्रिय गीत है. ‘अतौना अल्लाह यतीकेम, बैत मक्का येदिकुम,’ जिसका अर्थ है, हमें दे दो, अल्लाह तुम्हें इनाम देगा, वह तुम्हें मक्का में अपने पवित्र घर की यात्रा का आशीर्वाद देगा.
इंडोनेशिया
इंडोनेशिया में, मुसलमान रमजान से एक दिन पहले खुद को 'शुद्ध' करने के लिए अनुष्ठान करते हैं. इस परंपरा को ‘पदुसन’ कहा जाता है. वे प्राकृतिक झरने या पवित्र जल में स्नान करते हैं. अपने शरीर को साफ करते हैं. यहां एक और परंपरा है, जिसे ‘न्याद्रन’ कहा जाता है. इसके तहद परिवार अपने मृत परिवार के सदस्यों के लिए प्रार्थना करने हेतु कब्रिस्तानों में इकट्ठा होते हैं.
मिस्र (Egypt)
मध्य पूर्व के कई देशों में, रमजान माह में रोजा खत्म होने पर सांकेतिक रूप में तोपें दागी जाती हैं. इस परंपरा को ‘मिदफा अल इफ्तार’ या ‘हाजा फातमा’ के नाम से जाना जाता है. इसकी शुरुआत 200 साल पहले मिस्र में हुई थी, जब तुर्क शासक खोश क़दम का शासन था. वस्तुतः सूर्यास्त के समय एक नई तोप का परीक्षण करते समय, गलती से गोला छूट गया. काहिरा के नागरिकों ने इसे रोजा के अंत का संकेत माना. खोश कदम की बेटी हाजा फातमा ने इसे परंपरा बनाने का आग्रह किया.
मोरक्को
रमजान के दौरान, मोरक्को में एक व्यक्ति जिसे नफ़र कहते हैं, भ्रमण करता है, वह गंडोरा, चप्पल और पारंपरिक टोपी पहनता है. वस्तुतः वह अल-सुबह गीत गाते, हॉर्न बजाते हुए सड़कों पर भ्रमण करते हुए जाहिर करता है कि सहरी का वक्त हो गया है. यह परंपरा सातवीं शताब्दी से चली आ रही है.
इराक
इफ्तार के बाद, लोग म्हेइबे के एक पारंपरिक खेल के लिए एकत्र होते हैं. रमज़ान के दौरान पुरुषों द्वारा खेले जाने वाले इस खेल में लगभग 40 से 250 खिलाड़ियों के दो ग्रुप होते हैं, जो एक अंगूठी को छुपाते हैं. अन्य सदस्यों को अपनी गोद में मुट्ठियों को बांधकर बैठना होता है. ग्रुप का लीडर किसी एक खिलाड़ी को चुपके से रिंग देता है. उनके विरोधियों को बताना होता है कि रिंग किसके पास है.













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