भाषाएं हमारी पहचान, संस्कृति और सोच को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण एवं सशक्त माध्यम होती हैं, इसकी महत्ता को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने यूनेस्को द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस सेलिब्रेशन पर आधिकारिक मुहर लगाई. साल 1999 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा मनाया गया. बता दें कि बांग्लादेशियों (तब पूर्वी पाकिस्तानियों) के भाषा आंदोलन के सम्मान में यह दिन मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और संस्कृति की विविधता को समझना और सम्मानित करना है. यह मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार के लिए जागरूकता फैलाने का एक बेहतर अवसर है, ताकि भाषाई विविधता को बढ़ावा दिया जा सके और भाषाओं को विनष्ट अथवा लुप्त होने से बचाया जा सके. आइये जानते हैं, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा के महत्व, इतिहास एवं कुछ रोचक तथ्य...
कैसे शुरु हुआ अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस
दरअसल, 21 फरवरी 1952 को ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी मातृभाषा के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था. देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन उस समय नरसंहार में बदल गया, जब तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलानी शुरू की. इस घटना में डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गये, सैकड़ों घायल हुए. 1999 में यूनेस्को ने इस भाषाई आंदोलन में शहीद हुए लोगों की स्मृति में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा की. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2007 में सदस्य देशों से सभी भाषाओं के संरक्षण और सुरक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान किया यह भी पढ़ें : Breakup Day 2025 Messages & Images: ब्रेकअप डे पर अपने धोखेबाज साथी को भेजें ये हिंदी Shayaris, WhatsApp Stickers और Quotes
मातृभाषाओं का महत्व
मातृभाषा वह भाषा है, जो लोग बचपन में अपने माता-पिता या देखभाल करने वालों से सीखते एवं समझते हैं. यह आमतौर पर पहली भाषा है, जिसे लोग बोलते हैं और जिनका उपयोग अपने घर, परिवार और समुदाय के साथ संवाद के लिए करते हैं. मातृभाषा व्यक्ति विशेष की पहचान का अनिवार्य हिस्सा है, क्योंकि वे उनकी संस्कृति, मूल्यों और विश्वदृष्टि को प्रतिबिंबित करते हैं. इसके अलावा वे संज्ञानात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे व्यक्ति को जानकारी प्राप्त करने और संसाधित करने, विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने और महत्वपूर्ण सोच और रचनात्मकता विकसित करने में सक्षम बनाते हैं. तीसरी अहम बात उनकी शिक्षा और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
मातृभाषा दिवस पर कुछ फैक्ट
पहला मातृभाषा दिवस: मातृभाषा दिवस की शुरुआत 1999 में UNESCO द्वारा की गई थी.
बांगलादेश का महत्व: मातृभाषा दिवस की शुरुआत बांग्लादेश से जुड़ी हुई है. 1952 में, ढाका में छात्रों ने अपनी मातृभाषा 'बांग्ला' के अधिकार के लिए प्रदर्शन किया था, जिसमें कई छात्रों की मृत्यु हो गई थी.
विश्व भर में भाषाओं का संरक्षण: वर्तमान में दुनिया में 7000 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं. इनमें से 40% से अधिक भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं.
भारत में मातृभाषा का महत्व: भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं और देश में 122 प्रमुख भाषाएं बोली जाती हैं.
मातृभाषा का प्रभाव: अध्ययन में पाया गया है कि जिन बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा मिलती है, वे मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अधिक सक्षम होते हैं.
भाषाओं का मिश्रण: भारत में कई भाषाएं एक दूसरे से प्रभावित होती हैं. उदाहरण के लिए, हिंदी में संस्कृत, अरबी, फारसी, और अंग्रेजी शब्द मिलते हैं, जो दर्शाते हैं कि भाषाएँ आपस में कैसे आदान-प्रदान करती हैं.













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