साल में कुल चौबीस एकादशियां (12 कृष्ण पक्ष और 12 शुक्ल पक्ष) पड़ती हैं, हर एकादशी का अपना महत्व एवं लाभ होता है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस अवसर पर श्रद्धालु स्नान, ध्यान, दान, व्रत, पूजा आदि आध्यात्मिक कार्यों में लिप्त रहते हैं. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा एवं भक्ति के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है. ऐसी ही एक है इंदिरा एकादशी, जो अमूमन पितृ पक्ष के दौरान पड़ता है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार इंदिरा एकादशी पर पूजा-व्रत एवं पितरों का श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है. इस वर्ष 17 सितंबर 2025 को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाएगा. आइये जानते हैं इंदिरा एकादशी व्रत के संदर्भ में गरुड़ पुराण क्या कहता है, साथ ही जानेंगे इंदिरा एकादशी व्रत के महात्म्य, मुहूर्त एवं पूजा विधि आदि के बारे में...
यम की यातनाओं से मुक्ति
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति इंदिरा एकादशी व्रत रखता है और अगर उसकी मृत्यु एकादशी के दिन होती है तो उसकी आत्मा को यमलोक की यातनाएं नहीं झेलनी पड़तीं. इसीलिए पितृ पक्ष में एकादशी तिथि पर किया जानेवाला श्राद्ध कर्म बहुत महत्वपूर्ण है. ये पितरों की आत्मा को बल प्रदान करता है और उनके लिए मोक्ष के द्वार खोलता है. इस एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा इन्द्रसेन इहलोक में सुख भोगकर अन्त में स्वर्गलोक गया और उनके पिताजी को भी मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. यह भी पढ़ें : Solar Eclipse 2025: इस माह सूर्य ग्रहण कब लग रहा है और क्या विशेषता होगी इस ग्रहण की? क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण?
इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध का महत्व
गरुड़ पुराण के अनुसार जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या के पश्चात मिलता, उससे अधिक पुण्य एकमात्र इंदिरा एकादशी का व्रत एवं उस दिन श्राद्ध करने से मिल जाता है. पद्म पुराण के अनुसार इंदिरा एकादशी के श्राद्ध करने और गरीबों तथा जरूरतमंदों को दान देने से जातक की सात पीढ़ियों तक के पितर तर जाते हैं, और उन्हें जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है.
इंदिरा एकादशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
आश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी प्रारंभः 12.21 AM (17 सितंबर 2025, बुधवार)
आश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी समाप्तः 11.39 AM (17 सितंबर 2025, बुधवार)
उदया तिथि के अनुसार 17 सितंबर 2025 को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
शुभ योगः गौरी योग का शुभ संयोग रहेगा.
चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेंगे, जिससे गौरी योग का निर्माण होगा.
उपयुक्त योगों में व्रत एवं श्राद्ध करने वालों को पुण्य फल की प्राप्ति होगी.
इंदिरा एकादशी पूजा विधि
इंदिरा एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान-ध्यान करें. स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी जी का ध्यान कर व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. पूजा स्थल के पास एक चौकी रखें, इस पर पीला एवं लाल वस्त्र बिछाएं. इस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. धूप दीप प्रज्वलित कर निम्न मंत्र का जाप करें.
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’
या ‘ॐ नारायणाय नमः’
सर्वप्रथम भगवान विष्णु एवं देवी लक्ष्मी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और मिश्री) एवं गंगाजल से स्नान कराएं. अब भगवान को पान, सुपारी, फूल, पीला चंदन, अक्षत, रोली और तुलसी का पत्ता अर्पित करें. देवी लक्ष्मी को सुहाग की वस्तुएं चढ़ाएं. भोग में खीर, फल एवं दूध से बने मिष्ठान चढ़ाएं. विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें. अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारें. अगले दिन पारण काल में व्रत का समापन करें.










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