स्क्रीन टाइम, पावर नैप और तनाव; आपकी नींद की क्वालिटी को बिगाड़ रही ये चीजें, नई स्टडी में खुलासा
डॉ. भरत पटेल के अनुसार, स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) दिमाग को ज्यादा एक्टिव कर देती है और REM नींद को बाधित करती है. इसका सीधा असर यह होता है कि नींद गहरी नहीं आती और अगली सुबह थकान महसूस होती है.
अहमदाबाद के एलएम कॉलेज ऑफ फार्मेसी की एक हालिया स्टडी ने युवाओं की नींद की आदतों पर बड़ा खुलासा किया है. 18 से 40 साल के 278 लोगों पर हुई इस रिसर्च में पाया गया कि सोने से पहले स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, दिन में लंबे पावर नैप लेना और तनाव ये तीनों मिलकर नींद की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं. स्टडी में सामने आया कि जो लोग सोने से पहले 30 मिनट से ज्यादा स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, लैपटॉप) का इस्तेमाल करते हैं, उनकी नींद की गुणवत्ता काफी गिर जाती है. आंकड़ों के अनुसार, 45% ऐसे लोग खराब नींद से जूझ रहे हैं. जबकि 30 मिनट से कम स्क्रीन टाइम रखने वालों में यह संख्या केवल 25% है.
हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाती हैं पेन किलर दवाएं, सुधारें अपनी आदतें! नई स्टडी का बड़ा खुलासा.
डॉ. भरत पटेल के अनुसार, स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) दिमाग को ज्यादा एक्टिव कर देती है और REM नींद को बाधित करती है. इसका सीधा असर यह होता है कि नींद गहरी नहीं आती और अगली सुबह थकान महसूस होती है.
तनाव और नींद का रिश्ता
रिसर्च में पाया गया कि तनाव भी खराब नींद का बड़ा कारण है. जिन लोगों का स्ट्रेस लेवल ज्यादा था, उनमें बेचैन और अधूरी नींद की समस्या भी अधिक पाई गई.
पावर नैप भी बन सकता है दुश्मन
दिन में झपकी लेना यानी पावर नैप भले ही तरोताजा महसूस कराए, लेकिन लंबे नैप लेने वाले लोगों में रात की नींद बिगड़ जाती है. स्टडी के अनुसार, 44% नित्य झपकी लेने वाले लोग खराब नींद से परेशान थे, जबकि बिना नैप लेने वालों में यह आंकड़ा केवल 29% था. खासतौर पर 30 मिनट से ज्यादा का दोपहर का नैप नींद के नैचुरल साइकल को बिगाड़ देता है.
दिलचस्प नतीजे: कैफीन और निकोटिन का असर नहीं
वैश्विक शोधों के विपरीत इस अध्ययन में पाया गया कि कैफीन और निकोटिन का सीधा संबंध खराब नींद से नहीं दिखा. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह सांस्कृतिक और उपभोग पैटर्न के कारण हो सकता है.
कितने लोग जूझ रहे हैं इस समस्या से?
कुल 278 प्रतिभागियों में से करीब 36% लोग खराब नींद की समस्या से जूझ रहे थे. वहीं 44% लोग रोजाना 4 से 6 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं. यह आंकड़ा बताता है कि स्क्रीन हमारे जीवन में कितनी गहराई तक घुस चुकी है.
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
जीआईपीएस अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. हिमांशु देसाई के अनुसार,
- सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन से दूर रहें.
- दिनभर स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करें.
- नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाएं.
- तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लें.
यह स्टडी साफ तौर पर चेतावनी देती है कि स्क्रीन ओवरयूज, तनाव और गलत नैपिंग आदतें हमारी नींद की सबसे बड़ी दुश्मन हैं. अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया गया तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर डाल सकती हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 21, 2025 06:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

