Pana Sankranti 2026 Messages in Hindi: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बैसाख महीने की शुरुआत के साथ ही सौर नववर्ष (Solar New Year) का आगाज हो गया है. ओडिशा (Odisha) में इस दिन को 'पना संक्रांति' (Pana Sankranti) या 'उड़िया नववर्ष' (Odia New Year) के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस वर्ष यह पर्व 14 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं (मेष संक्रांति), तब इस नए कालचक्र की शुरुआत होती है, जो ओडिशा की संस्कृति और कृषि परंपरा में विशेष स्थान रखता है.
पना संक्रांति का नाम यहाँ के विशेष पेय 'पना' के नाम पर पड़ा है. इस पर्व से जुड़ी एक लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ ने स्वयं चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए इस पेय का निर्माण किया था.
यही कारण है कि आज के दिन भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा की जाती है और उन्हें पानी, गुड़, दही, छेना और विभिन्न मसालों से तैयार 'पना' अर्पित किया जाता है. यह पेय न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है.
पना संक्रांति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह नए कृषि वर्ष की शुरुआत का भी संकेत है. ओडिशा के किसान इस दिन अच्छी फसल और बेहतर मानसून के लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. राज्य भर में मंदिरों को सजाया जाता है और पारंपरिक लोक नृत्यों व संगीत के माध्यम से ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है.
आधुनिकता के इस दौर में पना संक्रांति के अवसर पर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान का स्वरूप भी बदला है. आज के दिन लोग अपने मित्रों और परिजनों को Hindi Quotes, WhatsApp Wishes और Facebook Greetings के जरिए उड़िया नववर्ष की बधाई दे रहे हैं. ये संदेश न केवल पर्व की खुशियां बढ़ाते हैं, बल्कि लोगों को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से भी जोड़े रखते हैं.





14 अप्रैल का यह दिन भारत की 'विविधता में एकता' को भी दर्शाता है. जहाँ ओडिशा में पना संक्रांति मनाई जा रही है, वहीं भारत के अन्य हिस्सों में भी इसी दिन को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है:
- पंजाब और हरियाणा: बैसाखी
- असम: बोहाग बिहू
- तमिलनाडु: पुथांडु
- केरल: विशु
पना संक्रांति का यह पर्व हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और नई शुरुआत के लिए प्रेरित करता है. भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद के साथ, यह दिन पूरे राज्य में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है.













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