Navreh 2026 Wishes In Hindi: भारत की सांस्कृतिक विविधता के रंग एक बार फिर बिखरने को तैयार हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नए साल की शुरुआत होती है. जहां महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा' और दक्षिण भारत में 'उगादि' कहा जाता है, वहीं कश्मीर में इसे 'नवरेह' (Navreh) के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष कश्मीरी समुदाय अपना नववर्ष 19 मार्च 2026 को मनाएगा, जिससे विक्रम संवत 2083 का आरंभ भी होगा.
'नवरेह' शब्द संस्कृत के 'नव-वर्ष' से निकला है. कश्मीरी पंडितों के लिए यह दिन केवल एक कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक पुनर्जागरण का प्रतीक है. देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में बसे कश्मीरी पंडित इस दिन को अपनी प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाते हैं. इस दिन लोग नए वस्त्र पहनते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. नवरेह के इस पावन अवसर पर कश्मीरी घरों में पारंपरिक और लजीज पकवान बनाए जाते हैं. परिवार के सभी सदस्य मिलकर भोजन का आनंद लेते हैं.
नवरेह के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और कुल देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया जाता है. यह पर्व कश्मीरी पंडितों को अपनी जड़ों और समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण जरिया है. इस खास अवसर पर आप नवरेह के इन शानदार हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए कश्मीरी नववर्ष की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





नवरेह के उत्सव की सबसे खास विशेषता 'थाल दर्शन' है. इसकी तैयारी पर्व से एक रात पहले ही कर ली जाती है. एक बड़ी थाली (थाल) में विभिन्न मांगलिक वस्तुएं सजाई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं. अगली सुबह, परिवार का हर सदस्य सबसे पहले इस थाल के दर्शन करता है. माना जाता है कि इन पवित्र वस्तुओं को सबसे पहले देखने से पूरा वर्ष शुभ और मंगलमय व्यतीत होता है.













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