Hindu New Year 2026: गुड़ी पड़वा, उगादि और चैत्र नवरात्रि का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराएं
19 मार्च, 2026 त्योहार कैलेंडर (File Image)

March 19, 2026 Festival Calendar: आज, 19 मार्च 2026 को भारत एक अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगम का साक्षी बन रहा है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की इस तिथि के साथ ही 'विक्रम संवत 2083' (Vikram Samvat 2083) और दक्षिण भारतीय चक्र (South Indian Chakra) के अनुसार 'विश्ववसु संवत्सर' का आरंभ हो गया है. खगोलीय दृष्टि से यह दिन चंद्रमा के पहले चरण के उदय और वसंत ऋतु की नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है. कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक, यह दिन 'हिंदू नववर्ष' (Hindu New Year) के रूप में मनाया जाता है, जहां विभिन्न क्षेत्रीय पहचानें एक साझा दर्शन के साथ एकजुट होती हैं. यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026 Wishes: चैत्र नवरात्रि के इन शानदार हिंदी WhatsApp Messages, Facebook Greetings, Quotes के जरिए दें अपनों को शुभकामनाएं

1. गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र और गोवा)

यह पर्व राजा शालिवाहन की विजय और भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

  • शुभ मुहूर्त: गुड़ी फहराने का सर्वोत्तम समय सुबह 7:00 बजे से 10:30 बजे तक (अमृत काल) है.
  • प्रमुख अनुष्ठान: सूर्योदय से पहले 'अभ्यंग स्नान' किया जाता है. घर के मुख्य द्वार पर बांस की छड़ी, रेशमी कपड़े, नीम की पत्तियों और तांबे के कलश से बनी 'गुड़ी' फहराई जाती है.
  • परंपरा: इस दिन नीम, गुड़ और जीरे का मिश्रण खाया जाता है, जो जीवन के कड़वे-मीठे अनुभवों के संतुलन का संदेश देता है.

2. उगादि (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक)

संस्कृत के 'युग' और 'आदि' से मिलकर बना यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है.

  • अभिजीत मुहूर्त: नए व्यापार या खरीदारी के लिए दोपहर 12:05 से 12:55 तक का समय सर्वश्रेष्ठ है.
  • उगादि पच्चड़ी: इस दिन छह स्वादों वाला विशेष व्यंजन बनाया जाता है. इसमें नीम के फूल (कड़वा-दुख), गुड़ (मीठा-सुख), मिर्च (तीखा-क्रोध), नमक (नमकीन-डर), इमली (खट्टा-चुनौती) और कच्चा आम (चटपटा-आश्चर्य) शामिल होते हैं.

3. चैत्र नवरात्रि - प्रथम दिन और घटस्थापना

आज से 'वासंतिक' नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी.

  • घटस्थापना मुहूर्त: कलश स्थापना के लिए सुबह 6:52 से 7:43 तक का समय अत्यंत शुभ है.  वैकल्पिक रूप से दोपहर 12:05 से 12:53 तक भी पूजा की जा सकती है।ृ.
  • विधि: आज मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। भक्त घरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं और सात्विक आहार का पालन करते हैं.

4. नवरेह (कश्मीर) और साजिबू नोंगमा पानबा (मणिपुर)

  • नवरेह: कश्मीरी पंडितों के लिए आज का दिन 'नवरेह' है. सुबह उठकर सबसे पहले 'थाल' (चावल, दर्पण, दही और सिक्कों से सजी थाली) के दर्शन किए जाते हैं ताकि पूरा वर्ष संपन्नता से भरा रहे.
  • साजिबू नोंगमा पानबा: मणिपुर के मेइतेई समुदाय के लिए यह चंद्र नववर्ष है. लोग दोपहर में स्थानीय पहाड़ियों की चढ़ाई (चिंग काबा) करते हैं, जो जीवन में आध्यात्मिक और व्यावसायिक उन्नति का प्रतीक है. यह भी पढ़ें: Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा कब है? जानें मराठी नव वर्ष की तिथि, शुभ मुहूर्त और परंपराएं

त्योहारों की समय सारणी: 19 मार्च 2026

त्योहार मुख्य समय महत्व
गुड़ी पड़वा सुबह 7:00 – 10:30 विजय ध्वज (गुड़ी) स्थापना
उगादि दोपहर 12:05 – 12:55 नए कार्यों की शुरुआत
चैत्र नवरात्रि सुबह 6:52 – 7:43 घटस्थापना (कलश पूजन)
नवरेह सूर्योदय से पूर्व पवित्र 'थाल' के दर्शन
साजिबू नोंगमा दोपहर बाद पहाड़ी पर चढ़ाई (उन्नति)

एकता और सद्भाव का संदेश

19 मार्च 2026 की यह तिथि केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि प्राचीन खगोलीय ज्ञान और मानवीय संवेदनाओं का नवीनीकरण है. विशेष बात यह है कि जहां हिंदू समुदाय अपना नववर्ष मना रहा है, वहीं चांद दिखने की संभावना के साथ देश ईद-उल-फितर की तैयारियों में भी जुटा है. यह संयोग भारत की साझा संस्कृति और सांप्रदायिक सद्भाव को और अधिक मजबूती प्रदान करता है.