8वां वेतन आयोग: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और परामर्श की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों (Central Government Employees' Organizations) ने वेतन ढांचे में एक बड़े बदलाव की मांग उठा दी है.'ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन' (All India NPS Employees Federation) (AINPSEF) सहित विभिन्न यूनियनों ने महंगाई भत्ते (DA) को सीधे मूल वेतन (Basic Pay) में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. यदि यह मांग मान ली जाती है, तो देश भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से पहले उठी बड़ी मांग, मूल वेतन के 50% के बराबर गारंटीड पेंशन और DA का प्रस्ताव
बेसिक पे में डीए के विलय की मांग क्यों?
यूनियनों का तर्क है कि महंगाई अब इतनी बढ़ चुकी है कि डीए को केवल एक अस्थायी राहत के रूप में नहीं देखा जा सकता. एआईएनपीएसईएफ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक महंगाई भत्ता (DA) लगभग 58% तक पहुंच चुका था. फेडरेशन का कहना है कि यह स्तर जीवन यापन की लागत में भारी वृद्धि और कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में आई कमी को दर्शाता है. यूनियनों का मानना है कि समय-समय पर होने वाली डीए वृद्धि आवास, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी बढ़ती शहरी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब पर्याप्त नहीं है.
वेतन संरचना पर क्या होगा असर?
महंगाई भत्ते का मूल वेतन में विलय होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन जैसे कई घटक सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं. एक बार जब डीए को मूल वेतन में समाहित कर लिया जाता है, तो पूरा वेतन ढांचा आनुपातिक रूप से बढ़ जाता है, जिससे कर्मचारियों को स्थायी और संचयी (Compounding) लाभ मिलता है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: न्यूनतम वेतन 65,000 और 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग; कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने रखा प्रस्ताव
₹60,000 न्यूनतम वेतन का गणित
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को वैज्ञानिक आधार पर संशोधित करने की मांग की है। एआईएनपीएसईएफ ने 'फैमिली यूनिट मॉडल' को तीन से बढ़ाकर पांच यूनिट करने का प्रस्ताव दिया है.
- फेडरेशन के अनुसार, प्रति यूनिट ₹6,000 के आधार पर न्यूनतम वेतन ₹30,000 होना चाहिए.
- इसमें 58% डीए जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग ₹47,400 पहुंचता है.
- पोषण और उपभोग खर्चों को जोड़ने के बाद, संगठनों का तर्क है कि न्यूनतम वेतन ₹55,000 से ₹60,000 के बीच निर्धारित किया जाना चाहिए.
आगे की राह
वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों के साथ सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है. पेंशन सुधार और फिटमेंट फैक्टर के साथ-साथ 'डीए मर्जर' इस समय सबसे बड़ी मांग बनकर उभरा है. चूंकि राज्य सरकारें अक्सर केंद्र के वेतन ढांचे का ही अनुसरण करती हैं, इसलिए इस फैसले का असर देशव्यापी होगा.













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