नई दिल्ली, 5 जून: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Central Government Employees and Pensioners) के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है. आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने विभिन्न हितधारकों, श्रमिक संघों और पेंशनभोगी एसोसिएशनों के लिए अपने सुझाव, आपत्तियां और मांग पत्र सौंपने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 15 जून 2026 कर दिया है. परामर्श प्रक्रिया शुरू होने के बाद से आयोग द्वारा दिया गया यह तीसरा समय-विस्तार (Extension) है. गौरतलब है कि इसके लिए शुरुआती खिड़की 30 अप्रैल को बंद होनी थी, जिसे पहले बढ़ाकर 31 मई और अब अंततः 15 जून किया गया है. आयोग ने साफ किया है कि इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगी संगठनों के लिए बड़ी खबर, वेतन-पेंशन सिफारिशों के लिए बढ़ी अंतिम तारीख
केवल ऑनलाइन माध्यम ही मान्य; नहीं स्वीकार होंगे भौतिक दस्तावेज
आयोग द्वारा जारी ताजा आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, सभी प्रकार के ज्ञापन और मांग पत्र केवल आयोग के आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे. आयोग ने प्रलेखन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी संगठन या व्यक्ति द्वारा भेजे गए हार्ड कॉपी (भौतिक दस्तावेज), ईमेल या पीडीएफ (PDF) प्रारूपों पर विचार नहीं किया जाएगा. यह कदम डिजिटल पारदर्शिता और त्वरित मिलान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
पुरानी पेंशन (OPS) बहाली और न्यूनतम सैलरी ₹69,000 करने की मांग
यह समय-विस्तार ऐसे समय में दिया गया है जब कर्मचारी संघों और सेवानिवृत्त कर्मचारी एसोसिएशनों की ओर से मांगों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना, महंगाई भत्ते (DA) के ढांचे में सुधार और 3.833 का उच्च फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू करना शामिल है.
यदि केंद्रीय नेतृत्व और आयोग द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) वर्तमान ₹18,000 से बढ़कर सीधे तौर पर लगभग ₹69,000 हो सकता है, जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा.
सैलरी और पेंशन एरियर पर क्या होगा असर?
आयोग की कार्यप्रणाली और सिफारिशें सौंपने में हो रहे इस विलंब का सरकार और कर्मचारियों दोनों पर गहरा और व्यापक असर पड़ेगा. पृष्ठभूमि की बात करें तो नया संशोधित वेतन ढांचा पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospectively) से 1 जनवरी 2026 से लागू होना प्रस्तावित है.
चूंकि सिफारिशों के क्रियान्वयन में देरी हो रही है, इसलिए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बढ़ा हुआ वेतन और पेंशन बकाया (Arrears) के रूप में लगातार जमा होता रहेगा. जब सरकार अंततः इन सिफारिशों को लागू करेगी, तो कर्मचारियों के खाते में एकमुश्त बड़ी एरियर राशि क्रेडिट होगी. हालांकि, इसके कारण सरकारी खजाने पर एक ही बार में भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा.
HRA के मोर्चे पर कर्मचारियों को हो सकता है नुकसान
जहां एक तरफ मूल वेतन पर मिलने वाला एरियर कर्मचारियों के लिए राहत की बात है, वहीं दूसरी तरफ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के मामले में यह देरी कर्मचारियों को भारी पड़ सकती है. वित्तीय नियमों के अनुसार, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का भुगतान आमतौर पर पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव से नहीं किया जाता है.
इसका सीधा अर्थ यह है कि जब तक संशोधित वेतनमान लंबित रहेंगे, तब तक की अवधि के लिए कर्मचारियों को पुराने ढांचे के अनुसार ही एचआरए मिलेगा. बाद में नए वेतनमान लागू होने पर भी उन्हें इस लंबित अवधि का बढ़ा हुआ HRA एरियर के रूप में मिलने की संभावना बेहद कम है, जिससे कर्मचारियों को उच्च HRA भुगतान का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है.













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