Gopashtami 2025: गोपाष्टमी (Gopashtami) पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है. यह सबसे पवित्र और श्रद्धेय पर्वों में से एक है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता के प्रति भक्ति, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है. गोपाष्टमी कृष्ण, गौवंश और प्रकृति के बीच उस दिव्य संबंध का प्रतीक है, जो संरक्षण, सेवा और आभार के भाव को दर्शाता है. हर वर्ष इस अवसर पर भक्तजन भगवान कृष्ण और गौ माता की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं तथा गौसेवा और दान के कार्यों में भाग लेते हैं. इस दिन दो शुभ योग भी बन रहे हैं, रवि योग एवं शिववस् योग, जिसके कारण पूजा-अर्चना विशेष रूप से फलदायी मानी गई है. आज 30 अक्टूबर को गोपाष्टमी मनाया जा रहा है. यह भी पढ़ें: Vaibhav Laxmi Vrat: सुख-शांति और वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए करें शुक्रवार व्रत
गोपाष्टमी पर क्या करना चाहिए
गोपाष्टमी के दिन गायों और बछड़ों को नहलाकर, फूलों से सजाकर उनकी पूजा की जाती है. कई भक्त गायों को चारा भी खिलाते हैं, चारा दान करते हैं और शांति व समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए कृष्ण मंत्रों का जाप करते हैं. आज के दिन शहरों में भी लोग अपनी गायों को लेकर मंदिर के बाहर बैठ जाते हैं ग्ताकी लोग गायों की पूजा कर सके और उन्हें चारा खिला सके.
गोपाष्टमी पौराणिक कथा
ब्रज क्षेत्र के गोकुल में लोग वर्षा के लिए नियमित रूप से इन्द्र देव की पूजा करते थे क्योंकि उन्हें मानना था कि वर्षा एवं घास-चराई का आधार इन्द्र-वर्षा है. भगवान् कृष्ण ने गोकुलवासियों को उनसे कहा कि उन्हें गायों, घास, चराई और प्रकृति-स्रोतों के प्रति आभारी होना चाहिए, न केवल इन्द्र के प्रति. लोगों ने कृष्ण की बात मानकर इंद्रदेव की पूजा छोड़ दी, जिसकी वजह से इंद्रदेव क्रोधित हो गए और गोकुल में धारदार वर्षा और तूफ़ान किया. इंद्र के इस हमले से बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी कने उंगली पर उठा ली और इसके नीचे गौवंश को सात दिन-सात रात सुरक्षित रखा. अंत में इन्द्र ने अपनी गलती स्वीकार की, कृष्ण की महिमा मानी. तबसे गोपाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है.












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